पुरुषार्थ और प्रारब्ध से होती है सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ति: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्री हिमाचल और मैंना के भगवती पार्वती का प्राकट्य, भगवती पार्वती के द्वारा विद्याध्ययन, देवर्षि नारद जी के मार्गदर्शन में कठोर तप और फिर शिव की प्राप्ति होती है। ईश्वर की प्राप्ति के लिए तप आवश्यक है।
हम-सबको केवल भगवान् की कृपा को ही देखना चाहिए÷ जो वस्तु पुरुषार्थ से प्राप्त हो, उसकी प्राप्ति के लिये कठिन पुरुषार्थ की आवश्यकता है। परन्तु परमात्मा की प्राप्ति पुरुषार्थ से नहीं होती, परमात्मा की प्राप्ति विवेक को महत्व देने से होती है, अथवा उसकी प्राप्ति की उत्कट अभिलाषा होने से होती है। विवेक मनुष्य मात्र को प्राप्त है। अतः मनुष्य मात्र परमात्मा की प्राप्ति का अधिकारी है।
सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ति के सब अधिकारी नहीं हैं। इच्छा मात्र से सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ति नहीं होती, पुरुषार्थ और प्रारब्ध से प्राप्ति होती है। परन्तु तीव्र इच्छा होने से परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है। यदि परमात्मा की प्राप्ति की उत्कट अभिलाषा हो जाय तो शुद्ध अन्तःकरण वाले को परमात्मा की प्राप्ति होती है। एक विशेष नियम है कि संसार की इच्छा पूरी होती ही नहीं।
अतः किसी बात की चिन्ता न करके, परमात्मा की प्राप्ति की इच्छा को बढ़ायें, अवश्य लाभ होगा इसमें संदेह नहीं है। भगवान् हम-सबपर कृपा करके हम-सबको कई प्रकार से चेतावनी देते हैं। उनके सिखाने के कई ढंग हैं। प्रत्येक परिस्थिति में उनकी कृपा भरी रहती है। जब परिस्थिति बदलती है तब भगवान की विशेष कृपा होती है। जैसे मां कभी बालक को स्नेह करती है, कभी उसे दण्ड देती है, पर दोनों ही अवस्थाओं में उसका स्नेह ही रहता है।
ऐसे भगवान् ,चाहे सुखदायी परिस्थिति भेजें अथवा दु:खदायी परिस्थिति भेजें, दोनों में उनकी कृपा एक समान ही रहती है। अतः हमें उन परिस्थितियों को न देखकर केवल भगवान् की कृपा को ही देखना चाहिए। मनुष्य के एक ओर संसार है और दूसरी ओर परमात्मा हैं, बीच में मनुष्य है अतः मनुष्य का खास काम है – संसार की सेवा करना और भगवान को याद करना। इसी में मनुष्य की मनुष्यता है, मानव शरीर की सार्थकता है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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