भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में 9% की बढ़ोतरी, अप्रैल में 10.35 अरब डॉलर के पार पहुंचा कारोबार

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India Engineering Exports April 2026: भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में FY26-27 के पहले महीने अप्रैल में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उद्योग से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार, इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर 8.78% बढ़कर 10.35 अरब डॉलर पर पहुंच गया. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 9.52 अरब डॉलर था. यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन गतिविधियों पर दबाव बना हुआ है. इसके बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है.

एल्युमीनियम और तांबा बने वृद्धि के प्रमुख आधार

इंजीनियरिंग निर्यात में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा योगदान एल्युमीनियम और उससे जुड़े उत्पादों का रहा. इस श्रेणी में अप्रैल के दौरान 38% की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं तांबा और उससे संबंधित उत्पादों के निर्यात में 80% की शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली. अप्रैल में विद्युत मशीनरी और उपकरणों के निर्यात में 9.5% की वृद्धि दर्ज की गई. इसके अलावा दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्यात में 36% की तेज बढ़ोतरी हुई. ऑटोमोबाइल पुर्जों और संबंधित उपकरणों के निर्यात में भी 7.2% की वृद्धि दर्ज की गई.

34 में से 28 उत्पाद श्रेणियों ने दिखाई मजबूती

इंजीनियरिंग उत्पादों की कुल 34 प्रमुख श्रेणियों में से 28 श्रेणियों ने अप्रैल के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज की. यह संकेत देता है कि निर्यात वृद्धि किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि अधिकांश उत्पाद समूहों में मांग मजबूत बनी रही. ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों और बाजारों में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय संघर्षों के कारण पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में कुछ दबाव बना हुआ है, लेकिन कई अन्य बाजारों ने इस कमी की भरपाई की है.

भारत-ओमान व्यापार समझौते का मिला लाभ

पंकज चड्ढा के अनुसार हाल ही में हुए भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार समझौते का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है. इसके चलते ओमान को होने वाले इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि भारत ने कई प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं. अब उद्योग और नीति निर्माताओं को बाजार पहुंच से जुड़ी चुनौतियों को दूर कर इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने की दिशा में काम करना होगा.

अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी बने प्रमुख बाजार

अप्रैल के दौरान भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी सबसे बड़े बाजार रहे. हालांकि संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और सऊदी अरब को होने वाले निर्यात में कुछ गिरावट दर्ज की गई. चीन को भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात अप्रैल में सालाना आधार पर 81.7% बढ़कर 301.08 मिलियन डॉलर हो गया. यह वृद्धि भारतीय उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाती है.

उत्तरी अमेरिका और यूरोप में मजबूत मांग

क्षेत्रीय आधार पर उत्तरी अमेरिका में 7.1% और यूरोपीय संघ के देशों में 13% की वृद्धि दर्ज की गई. इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने भारत के कुल इंजीनियरिंग निर्यात को मजबूत आधार प्रदान किया. वहीं पश्चिम एशिया और आसियान देशों के बाजारों में मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही. ऑटोमोबाइल और उससे जुड़े उत्पादों की कम खेप तथा सीमित मांग के कारण इन क्षेत्रों में निर्यात प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा.

कुल निर्यात में हिस्सेदारी थोड़ी घटी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में भारत के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी 23.8% रही. हालांकि यह पिछले वर्ष अप्रैल में दर्ज 24.9% के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन कुल निर्यात मूल्य में मजबूत वृद्धि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है.

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