Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान श्री राम चारों भाई गुरुकुल में विद्या अध्ययन करते हैं। अध्ययन सम्पूर्ण होने के बाद अयोध्या में एक ही चर्चा है कि चारों भाइयों का विवाह कहां होगा? परिवार में कोई बालक बहुत श्रेष्ठ होता है, तो माता-पिता विचार करते हैं कि इतनी योग्य कन्या कहां मिलेगी। व कोई कन्या बहुत श्रेष्ठ हो तो फिर माता-पिता चिंतन करते हैं कि- इतना योग्य वर कहां मिलेगा, क्योंकि विवाह तो सामान के साथ ही हो सकता है।
जहां बहुत असमानता हो वहां विवाह संस्कार अनुचित माना गया है।
जौं घरु वरु कुल होई अनूपा। करिअ विवाह सुता अनुरूपा।।
श्रीअयोध्या जी में विश्वामित्र ऋषि का आगमन, महाराज दशरथ के द्वारा उनका स्वागत सम्मान, श्री विश्वामित्र जी द्वारा यज्ञरक्षा के लिये श्री राम लक्ष्मण की मांग। पहले महाराज दशरथ का विचलित होना, मना करना। इसके बाद श्री रामचरितमानस में गुरु की महिमा बताई गयी। गुरुदेव वशिष्ठ ने कह दिया कि श्री राम लक्ष्मण को विश्वामित्र जी को समर्पित कर दीजिए। फिर दशरथ जी ने एक शब्द भी नहीं कहा।श्री राम लक्ष्मण को समर्पित किये। भारतवर्ष में अनादि काल से माता-पिता गुरु का बड़ा सम्मान था और होना चाहिए।
भगवान श्री राम लक्ष्मण गुरुदेव विश्वामित्र जी के साथ पिता की आज्ञा से यज्ञरक्षा के लिए प्रस्थान करते हैं। यज्ञरक्षा में भगवान के द्वारा ताड़का का उद्धार,मारीच को सौ योजन दूर फेंक देना, सुबाहु समेत अनेक राक्षसों के उद्धार का वर्णन किया गया। जनकपुर जाते समय मार्ग में पत्थर शिला बनी हुई माता अहिल्या का भगवान की चरण धूलि से उद्धार। पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज अहिल्या उद्धार के समय कहते हैं। हे मन जिन भगवान ने माता अहिल्या का उद्धार किया, उनको तू क्यों नहीं भजता।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।