सद्भावपूर्ण सेवा से प्राप्त होता है आशीर्वाद: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, अन्तर के आशीर्वाद मांगने से नहीं, सेवा करने से मिलते हैं। स्वयं का यश दूसरों को देने वाला ही सबके आशीर्वाद प्राप्त करता है, जो सेवा द्वारा सबके आशीर्वाद प्राप्त करता है, उसे सर्वेश्वर मिलते हैं। आशीर्वाद कोई देने लेने वाली वस्तु नहीं है।
आशीर्वाद और श्राप स्वतः घटी हुई घटना है। हमारे व्यवहार से किसी आदरणीय सज्जन या निर्दोष जीव को प्रसन्नता हुई, उनकी प्रसन्नता ही हमारे लिए आशीर्वाद हो गया। हमारे किसी कार्य से किसी सज्जन व्यक्ति या किसी जीव को पीड़ा पहुंची, उसने भले कुछ कहा नहीं, लेकिन वही हमारे लिए श्राप हो गया।
तुलसी हाय गरीब की कबहुँ  न खाली जाय।
 मुये घोड़े के चाम से लोहा भसम हो जाय।।
कई लोग अपने वृद्ध माता-पिता को दुःखी करने में कोई कसर नहीं रखते और कहीं जाना हो तो बूढ़े मां-बाप से कहते हैं, आशीर्वाद दीजिये।वे तो वैसे भी उनसे बहुत परेशान हैं लेकिन जबरदस्ती वृद्ध माता-पिता का हाथ अपने मस्तक पर रख लेते हैं और मान लेते हैं कि आशीर्वाद मिल गया। माता-पिता के हाथ को जबरदस्ती मस्तक पर रखने से आशीर्वाद मिलता है कि नहीं, पता नहीं लेकिन माता-पिता की सेवा करने से, बड़ों की सेवा करने से आशीर्वाद मिलता ही है इसमें कोई संदेह नहीं है।
अपने यहां एक ऐसी मान्यता है कि गाय की पूंछ आंख से लगाने से पाप धुल जाता है। लोग गाय की पूछ आंख से लगा लेते हैं और मान लेते हैं कि पाप धुल गया। बिना गौ सेवा के केवल पूँछ आंख से लगाने से पाप धुलता है कि नहीं, पता नहीं। लेकिन गौ माता की सेवा करने से पाप धुलता ही है इसमें कोई संदेह नहीं है। संत महापुरुष कहते हैं कि आशीर्वाद सद्भावपूर्ण सेवा से प्राप्त होता है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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