भारत में पेड़-पौधों का महत्व केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है. प्राचीन समय से ही देश में कई पौधों का इस्तेमाल औषधीय जरूरतों के लिए भी किया जाता रहा है. इन्हीं महत्वपूर्ण पौधों में बेल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. संस्कृत में इसे बिल्व और अंग्रेजी में वुड एप्पल कहा जाता है. नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड, आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेल के औषधीय महत्व से जुड़ी जानकारी साझा की है.
बेल को क्यों माना जाता है खास
वनस्पति विज्ञान में बेल का नाम एगल मार्मेलोस (Aegle marmelos) है और यह रैसेसी परिवार से संबंधित है. यह पेड़ मुख्य रूप से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया का मूल निवासी माना जाता है. भारत में इसे सूखे जंगलों और मैदानी इलाकों में आसानी से देखा जा सकता है. बेल की खासियत यह है कि यह अलग-अलग तरह की जलवायु परिस्थितियों में भी पनपने की क्षमता रखता है. इतना ही नहीं, कम उपजाऊ मिट्टी में भी यह पेड़ अच्छी तरह विकसित हो सकता है. यही वजह है कि भारतीय उपमहाद्वीप के कई हिस्सों में बेल का पेड़ आम तौर पर देखने को मिलता है.
15 मीटर तक ऊंचा हो सकता है बेल का पेड़
बेल एक मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष है, जिसकी ऊंचाई करीब 15 मीटर तक पहुंच सकती है. इसकी पत्तियां तीन पत्तियों के समूह में होती हैं, जिन्हें त्रिपर्णी कहा जाता है. इन पत्तियों में हल्की सुगंध पाई जाती है. बेल के फूल हरे-सफेद रंग के और सुगंधित होते हैं. इसका फल भी कई कारणों से खास माना जाता है. कच्चे बेल के फल के साथ-साथ सूखने के बाद भी इसका पारंपरिक उपयोग किया जाता है.
आयुर्वेद में बेल का खास महत्व
आयुर्वेद में बेल को लंबे समय से एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधे के तौर पर देखा जाता रहा है. इसके फल, पत्तियों और जड़ का इस्तेमाल अलग-अलग पारंपरिक औषधीय जरूरतों में किया जाता है. विशेष रूप से बेल के फल को पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं के लिए उपयोगी माना जाता है. राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, बेल में एंटी-डायरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल जैसे औषधीय गुण बताए गए हैं. इसके अलावा बेल में एंटीबायोटिक और ब्रोंकोडायलेटर गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है. यानी पारंपरिक औषधीय उपयोगों के लिहाज से बेल के अलग-अलग हिस्सों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
भगवान शिव की पूजा में भी चढ़ता है बेलपत्र
बेल का महत्व केवल औषधीय उपयोग तक ही सीमित नहीं है. भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में भी इस पेड़ का विशेष स्थान है. भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है. यही कारण है कि भारतीय समाज में बेल का पेड़ एक साथ कई स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जाता है. एक तरफ इसके फल, पत्तियों और जड़ का पारंपरिक औषधीय उपयोग होता है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक परंपराओं में बेलपत्र का विशेष महत्व है.
यह भी पढ़े: दिल्ली ओखला फेज-1 में सिलेंडर विस्फोट से दर्दनाक हादसा, दो लोगों की मौत

