Power Sector: भारत का बिजली क्षेत्र पिछले एक दशक में तेजी से बदला है. देश में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने, उद्योगों के विस्तार, शहरीकरण और घरों में बिजली की खपत बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी लगातार बढ़ी है. इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर निवेश किया है. केंद्र सरकार के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में देश की अधिकतम बिजली मांग यानी पीक पावर डिमांड करीब दोगुनी हो गई है. वर्ष 2013-14 में देश की पीक बिजली मांग 135.9 गीगावाट थी, जो 21 मई 2026 को बढ़कर रिकॉर्ड 270.8 गीगावाट तक पहुंच गई. सरकार के अनुसार, बिजली की मांग में यह उछाल आर्थिक गतिविधियों, शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और घरेलू खपत में लगातार हो रही बढ़ोतरी से जुड़ा है.
10 साल में 249 GW से 552 GW हुई बिजली क्षमता
बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए देश की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में भी बड़ा इजाफा हुआ है. मार्च 2014 में भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 249 गीगावाट थी. जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 552 गीगावाट हो गई. यानी एक दशक से कुछ अधिक समय में देश की बिजली उत्पादन क्षमता में 300 गीगावाट से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. नई क्षमता जुड़ने से मौजूदा बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है और आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली मांग के लिए भी बिजली व्यवस्था को मजबूत आधार मिला है.
ट्रांसमिशन नेटवर्क भी हुआ मजबूत
सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है. बिजली को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क भी जरूरी है. इस मोर्चे पर भी भारत ने पिछले वर्षों में काफी विस्तार किया है. अप्रैल 2014 में देश का ट्रांसमिशन नेटवर्क 2,91,336 सर्किट किलोमीटर (CKM) था. जुलाई 2026 तक इसकी लंबाई बढ़कर 5,10,594 सर्किट किलोमीटर हो गई. ट्रांसमिशन नेटवर्क के इस विस्तार से राष्ट्रीय ग्रिड को ज्यादा एकीकृत बनाने में मदद मिली है. साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बिजली के प्रवाह को आसान करने और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में भी इसका योगदान रहा है.
Renewable Energy में भारत बना दुनिया का तीसरा बड़ा देश
भारत ने बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ स्वच्छ ऊर्जा पर भी अपना फोकस मजबूत किया है. अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की Renewable Energy Statistics 2026 रिपोर्ट के अनुसार, स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत अब चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. यह बदलाव भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बड़े परिवर्तन को दर्शाता है, जहां पारंपरिक बिजली स्रोतों के साथ-साथ सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है.
283.46 GW पहुंची गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता
31 मार्च 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई थी. इसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता शामिल है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 55.3 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता जोड़ी. यह एक साल में जोड़ी गई अब तक की सबसे बड़ी गैर-जीवाश्म क्षमता है. खास बात यह है कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह बढ़ोतरी करीब दोगुनी रही.
2030 का लक्ष्य पांच साल पहले हासिल
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. जून 2025 में देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई. इसके साथ भारत ने पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2030 तक हासिल किए जाने वाले इस लक्ष्य को निर्धारित समय से पांच साल पहले ही पूरा कर लिया. बिजली की बढ़ती मांग के बीच उत्पादन क्षमता, ट्रांसमिशन नेटवर्क और गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में हुआ यह विस्तार भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे व्यापक बदलाव को दिखाता है. आने वाले समय में बिजली की जरूरत और बढ़ने की संभावना के बीच उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का यह विस्तार देश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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