H1B Visa: अमेरिका भारतीयों को बड़ा झटका देने की तैयारी में दिख रहा है. अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले भारतीय IT पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा को लेकर नई चिंता सामने आई है. अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी’एस्पोसिटो ने कहा है कि अगले 365 दिनों में विदेशी श्रम वीजा व्यवस्था आज की तुलना में काफी अलग दिखाई दे सकती है. ऐसे समय उनका बयान आया है, जब अमेरिकी सरकार एच-1बी व्यवस्था में कथित धोखाधड़ी, कर्मचारियों के शोषण और नियमों के उल्लंघन की देशव्यापी जांच तेज कर रही है. हालांकि, उनके बयान में एच-1बी कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने का कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है.
डीएस्पोसिटो ने अमेरिकी टिप्पणीकार बेनी जॉनसन के साथ बातचीत में कहा कि विदेशी श्रम वीजा कार्यक्रम अब से 365 दिन बाद मौजूदा व्यवस्था से काफी अलग हो सकता है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जांच एजेंसियां केवल कागजी अनियमितताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कथित फर्जीवाड़े और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में हैं. अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक कार्यालय के मुताबिक, एच-1बी वीजा में संभावित धोखाधड़ी को लेकर देशव्यापी जांच चल रही है. अगस्त में विभाग ने बताया था कि डलास में कई ऐसे परिसरों की जांच की गई, जहां सैकड़ों स्वीकृत एच-1बी आवेदनों से जुड़ी कंपनियां दर्ज थीं. अधिकारियों को कुछ स्थानों पर कारोबार सक्रिय होने के बहुत कम संकेत मिले.
अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, जांच के दौरान दर्जनों समन जारी किए गए हैं और तलाशी वारंट भी लागू किए गए हैं. एच-1बी से जुड़े आवेदनों में कॉग्निजेंट और क्लाउडेरा से संबंधित मामलों को आपराधिक जांच पूरी होने तक निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. इस जांच का दायरा कथित विदेशी श्रम फर्जीवाड़े, कर्मचारियों के शोषण और संभावित मानव तस्करी जैसे मामलों तक बताया गया है. डी एस्पोसिटो के अनुसार, अधिकारियों का उद्देश्य ऐसे मामलों के खिलाफ सबूत जुटाना है, जिनमें वीजा व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग हुआ हो.
क्या है प्रोजेक्ट फायरवॉल?
अमेरिकी श्रम विभाग ने सितंबर 2025 में प्रोजेक्ट फायरवॉल शुरू किया था. इसका उद्देश्य एच-1बी व्यवस्था में नियमों के पालन को मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी श्रमिकों के अधिकार, वेतन और रोजगार के अवसर प्रभावित न हों. विभाग ऐसे नियोक्ताओं की जांच को प्राथमिकता देता है, जिन पर अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने, योग्य अमेरिकी उम्मीदवारों की वास्तविक भर्ती नहीं करने या एच-1बी कर्मचारियों को अनुचित प्राथमिकता देने के आरोप हों. उल्लंघन मिलने पर विभाग पिछला बकाया वेतन दिलाने, आर्थिक दंड लगाने और कुछ मामलों में नियोक्ता को एच-1बी कार्यक्रम से बाहर करने जैसी कार्रवाई कर सकता है.
एच-1बी वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने की अनुमति देता है. भारतीय आईटी पेशेवर लंबे समय से इस व्यवस्था के सबसे बड़े लाभार्थी समूहों में रहे हैं. इसलिए नियमों में बड़े बदलाव, जांच में तेजी या आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त सख्ती का असर भारत से अमेरिका जाने वाले तकनीकी पेशेवरों पर पड़ सकता है. हालांकि, मौजूदा स्थिति में यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका एच-1बी वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने जा रहा है. अमेरिकी श्रम विभाग की आधिकारिक जानकारी में एच-1बी कार्यक्रम अभी भी सक्रिय है और प्रोजेक्ट फायरवॉल को इसके प्रवर्तन और निगरानी अभियान के रूप में बताया गया है.
फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, जिसमें एच-1बी वीजा कार्यक्रम को समाप्त करने की घोषणा की गई हो. डी’एस्पोसिटो का बयान मुख्य रूप से व्यवस्था में बड़े बदलाव, जांच और नियमों के कड़े प्रवर्तन की ओर इशारा करता है. इसलिए अभी सबसे स्पष्ट संकेत व्यवस्था को सख्त करने और कथित फर्जीवाड़े पर कार्रवाई बढ़ाने के हैं, न कि एच-1बी को तत्काल खत्म करने का.

