सर्दी-जुकाम से लेकर मोटापा व डायबिटीज तक…, कपालभाति के इन प्रकारों से मिलेगी राहत

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Kapalbhati: योग को शरीर और मन को स्वस्थ रखने का एक बेहतरीन माध्यम माना जाता है. योग में कई ऐसी क्रियाएं शामिल हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को भी शांत रखने में मदद करती है. इन्हीं में से एक है, ‘कपालभाति प्राणायम’. यह एक शुद्धिकरण क्रिया है, जिसमें सांस को तेजी से बाहर छोड़ा जाता है.

आयुष मंत्रालय के अनुसार, कफ दोषों को दूर करने और शरीर के शुद्धीकरण (षट्कर्म) के लिए कपालभाति के तीन प्रकार बताए गए हैं—’वातक्रम कपालभाति’, ‘व्युत्क्रम कपालभाति’ और ‘शीतक्रम कपालभाति’. आइए जानते हैं इन तीनों प्रकारों के बारे में और इन्हें करने से किस तरह के फायदे होते हैं.

वातक्रम कपालभाति

यह कपालभाति का सबसे प्रचलित और मूल रूप है, जिसे सामान्यतः प्राणायाम की तरह अभ्यास किया जाता है. यह फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाती है और सर्दी, राइनाइटिस, साइनोसाइटिस और अस्थमा जैसी समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करती है. नाभि के सक्रिय संकुचन से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, जिससे पाचन में सुधार होता है और मोटापा व मधुमेह (डायबिटीज) को नियंत्रित करने में मदद मिलती है. इसके नियमित अभ्यास से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है, मानसिक स्पष्टता आती है और डिफॉल्ट मोड नेटवर्क को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.

व्युत्क्रम कपालभाति

यह जल-आधारित एक शुद्धीकरण (शोधन) क्रिया है. इसमें गुनगुने नमकयुक्त जल को नाक (नासिका-छिद्रों) से अंदर खींचा जाता है और उसे मुंह के रास्ते बाहर निकाला जाता है. इसके नियमित अभ्यास से साइनस की समस्याओं से निजात मिलने लगती है, जिससे सामान्य सर्दी-जुकाम, साइनोसाइटिस और राइनाइटिस जैसी समस्याओं में आराम मिलता है. साथ ही, यह खोपड़ी के अग्र भाग को उत्तेजित करता है, जिससे मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक (भाति) आती है.

शीतक्रम कपालभाति

यह क्रिया व्युत्क्रम कपालभाति के बिल्कुल विपरीत होती है. इसमें गुनगुना पानी मुंह में लेकर नासिका-छिद्रों के रास्ते बाहर निकाला जाता है. यह क्रिया सिर और श्वसन तंत्र से संबंधित सभी प्रकार के कफ दोषों को दूर करने में बेहद प्रभावी है. योगिक मान्यताओं के अनुसार, इसका नियमित अभ्यास चेहरे की झुर्रियों को दूर करने और त्वचा में प्राकृतिक चमक (कपाल की दमक) लाने में मदद करता है. साथ ही, यह नाक के मार्ग को पूरी तरह साफ करता है और वायुमार्ग में फंसे अतिरिक्त बलगम को बाहर निकाल देती है.

आयुष मंत्रालय के अनुसार, कपालभाति मुख्य रूप से कपाल और ऊपरी श्वसन तंत्र के शोधन के लिए एक बेहतरीन तकनीक है. यह शरीर से 20 प्रकार के कफ दोषों का नाश करती है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाती है और मधुमेह एवं मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है.

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