Prithvi Mudra Benefits: रोजाना करें पृथ्वी मुद्रा का अभ्यास, मन की बेचैनी से लेकर कमजोरी तक में मिल सकते हैं ये फायदे

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Prithvi Mudra Benefits: योग में शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह की मुद्राओं का अभ्यास कराया जाता है. इन्हीं में से एक है पृथ्वी मुद्रा. योग और आयुर्वेद की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यह मुद्रा शरीर में पृथ्वी तत्व को संतुलित करने, मानसिक स्थिरता बढ़ाने और शारीरिक ऊर्जा को बेहतर बनाए रखने में सहायक मानी जाती है. खास बात यह है कि इसका अभ्यास करना बेहद आसान है और इसे बैठकर भी किया जा सकता है.

क्या है पृथ्वी मुद्रा और कैसे करें अभ्यास?

पंचमहाभूत की अवधारणा के अनुसार, हमारा शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश पांच तत्वों से मिलकर बना है. पारंपरिक योग पद्धति में हाथ की अलग-अलग उंगलियों को इन तत्वों का प्रतीक माना जाता है. इसमें अनामिका उंगली पृथ्वी तत्व और अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है. पृथ्वी मुद्रा बनाने के लिए अनामिका उंगली के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से हल्के से मिलाया जाता है. बाकी तीनों उंगलियों को सीधा रखा जाता है. इस तरह दोनों हाथों से पृथ्वी मुद्रा बनाई जा सकती है. योग परंपरा में माना जाता है कि इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से शरीर में पृथ्वी तत्व का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है.

मानसिक बेचैनी और डर कम करने में मानी जाती है सहायक

योग की पारंपरिक मान्यताओं में मूलाधार चक्र को स्थिरता, सुरक्षा और आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जाता है. इसे रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से से संबंधित माना जाता है. जब व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर महसूस करता है, तो उसके मन में डर, बेचैनी और तनाव जैसी भावनाएं बढ़ सकती हैं. पृथ्वी मुद्रा को मूलाधार चक्र से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि इसके अभ्यास से मन को स्थिर रखने, धैर्य बढ़ाने और मानसिक शांति महसूस करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, चिंता या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का यह प्रमाणित इलाज नहीं है.

त्वचा की सेहत के लिए भी बताई जाती है फायदेमंद

पृथ्वी मुद्रा को त्वचा की सेहत से भी जोड़कर देखा जाता है. पारंपरिक योग मान्यताओं के अनुसार, पृथ्वी तत्व शरीर के ठोस ऊतकों और पोषण से संबंधित है. इसी आधार पर माना जाता है कि यह मुद्रा त्वचा को स्वस्थ रखने और प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायक हो सकती है. हालांकि, पृथ्वी मुद्रा से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने, रक्त संचार बेहतर होने या त्वचा का रूखापन दूर होने के दावों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नियमित देखभाल जरूरी है.

दुबलेपन और कमजोर पाचन में क्या है इसकी भूमिका?

पारंपरिक योग और आयुर्वेद में पृथ्वी मुद्रा को शरीर की ऊर्जा और पोषण से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि यह कमजोर पाचन और दुबलेपन से परेशान लोगों के लिए सहायक हो सकती है. कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह शरीर में पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करती है. हालांकि, वजन बढ़ाने या पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करने के लिए पृथ्वी मुद्रा को अकेले प्रभावी उपचार नहीं माना जा सकता. इसके लिए पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी है.

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों को कफ की अधिकता, सर्दी-खांसी या अस्थमा जैसी समस्या रहती है, उन्हें पृथ्वी मुद्रा का नियमित अभ्यास शुरू करने से पहले योग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए. अस्थमा या सांस संबंधी बीमारी में डॉक्टर की बताई दवाओं और उपचार को जारी रखना जरूरी है. किसी भी बीमारी के इलाज के विकल्प के रूप में केवल योग मुद्रा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.

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