सच्चा वैष्णव भक्त प्रभु चिंतन के सामने तीनों लोकों का सुख भी त्याग देता है : दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, शौनकादि ऋषियों द्वारा प्रश्न, चौबीस अवतार का वर्णन, भगवान व्यास का अवतार, भागवत की रचना, परीक्षित का जन्म, राज्याभिषेक, दिग्विजय, कलियुग का निग्रह, ऋषि श्रृंगी का श्राप, राजा परीक्षित का राज्य से संन्यास लेकर शुकताल पधारना। वहां संतों की सभा होना और श्रीशुकदेवजी का आगमन।
भागवत में लिखा है कि भगवान् के प्यारे भक्त का लक्षण क्या है? यदि ब्रह्मा यह कह रहे हों कि हम तुम्हें त्रिलोक की सुख संपत्ति दे देते हैं, आधे निमिष के लिये, पलक गिरने में जितना समय लगता है, उससे आधे समय के लिये, तुम अपने ठाकुर जी का चिन्तन छोड़कर हमारी ओर देख लो। अगर वह भगवान का सच्चा वैष्णव भक्त बना है तो तीन लोक की सम्पत्ति को ठुकरा देगा लेकिन आधे निमिष के लिये भी ठाकुर‌जी का दर्शन बन्द नहीं करेगा।
श्री शुकदेव जी कहते हैं- परीक्षित! प्रभु का नित्य दर्शन हो रहा है, हर समय समीपता है लेकिन तृप्ति नहीं – रास पंचाध्यायी में आया है कि गोपांगना भगवान को देख रही हैं,भक्तजन पलक झपके बिना देख रहे हैं लेकिन भगवान के दर्शन की इच्छा कम नहीं हो रही। गोपांगना की बात छोड़ो, भगवती राधा रानी अनादिकाल से अभी तक श्याम सुन्दर को देखते आ रही है लेकिन अभी तक दर्शन की लालसा बढ़ती जा रही है। अभी तक नेत्रों की तृप्ति नहीं हो पाई।
एक साथ रहने के बाद भी प्रभु का स्वरूप नित्य नया होता है, नित्य नवायमान रहता है, प्रतिक्षण नित्य नई आकृति ठाकुर जी की बनती है। एक तो १५-१६ वर्ष से अधिक उनकी अवस्था नहीं दिखाई देती; काल का प्रभाव पड़ता नहीं। ये दो-तीन बातें सदा ध्यान रहें कि ठाकुर जी को कभी बुढ़ापा नहीं आता। भगवान् के बाल कभी सफेद नहीं होते; दाढ़ी-मूंछ नहीं आती और शस्त्र लग जाये तो दवा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। देखने वाले को लगेगा कि शस्त्र लगा और वहां रक्त निकल रहा है लेकिन वहां रक्त निकलता नहीं।
क्योंकि भगवान का शरीर पांच भौतिक होता ही नहीं, जब शरीर ही पंचभूत से निर्मित नहीं है तो चोट कैसे लगेगी?
चिदानंदमय देह तुम्हारी।
विगत विकार जान अधिकारी।।
संसार का स्नेह पूर्वान्ह की छाया के समान है। सुबह की छाया दोपहर होते-होते छोटी होती जाती है और दोपहर बाद की छाया सायंकाल होते-होते बढ़ती जाती है। संसार का स्नेह धीरे-धीरे घटता जाता है और ईश्वर का स्नेह अपरान्ह की छाया के समान है जो उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है।सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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