मन को प्रभु में पिरोए रखना ही प्रभु की सेवा: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सांसारिक काम करते-करते परमात्मा को भूल न जाएं इसका हम सबको हमेशा ख्याल रखना चाहिए। हम लोग दुःखी हैं क्योंकि हम लोग परमात्मा को भूल गए हैं, उनके उपकार को भूल गए हैं।  जो आज तक मेरा नहीं हुआ और आगे भी नहीं होने वाला है, उस जगत को भूल जाना है- ऐसा निश्चय करो। जो ईश्वर को भीतर ढूंढने के बजाय बाहर ढूंढते हैं, उनका उपहास होता है।
वर्ष में कम से कम एक-आध महीना तो तीर्थ में जाकर प्रभु-भजन अवश्य करो। ईश्वर वाणी का विषय नहीं है, वह तो जीवन में अनुभव करने एवं साक्षात्कार-प्राप्त करने का विषय है। जिसको ईश्वर याद करता है, उसका जीवन सफल होता है। मन को प्रभु में पिरोए रखना ही प्रभु की सेवा है। सांसारिक सम्बन्ध शायद धोखा दे, परन्तु परमात्मा से बधा हुआ भक्ति सम्बन्ध कभी धोखा नहीं देता।
संसार की विस्मृति हो तभी ब्रह्म सम्बन्ध स्थापित होता है। यदि जगत विस्मृत हो जाए और मन प्रभु स्मरण में खो जाए, तो प्रभु के साथ भक्ति सम्बन्ध बन जाता है। ईश्वर को भूलने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता। सुख में प्रभु का स्मरण करो, दुःख में धीरज रखो। कामकाज करते समय हमेशा परमात्मा को याद करो। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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