Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सत्संग के बिना न तो विवेक जागृत होता है और न स्वदोष का भान ही होता है। जब तक हमें अपने दोषों का पता नहीं लगेगा, तब तक हम उससे छुटकारा पाने का प्रयास नहीं करेंगे और हमारे दोषों की निवृत्ति नहीं होगी। कथा माता है। ये नया जन्म देती है। इसीलिए कथा सुनने के बाद पुराने दोषों का नाश होना चाहिए। कथा सुनने के बाद स्वभाव सुधरना चाहिए।
कथा सुनने के बाद किये गये पापों के लिये मन में पछतावा होना चाहिए। कथा सुनने के बाद हृदय में यह भाव जागृत होना चाहिए कि मेरे पास जो कुछ है, वह प्रभु का है और मैं तो उनका सेवक हूं। कथा सुनने के बाद हृदय में यदि ऐसे निर्मल भाव नहीं जगे तो मानना कि हमने सही ढंग से कथा नहीं सुनी है। भागवत तो भवरोग की उत्तम दवा है।
औषधि तो उत्तम ही है,परन्तु वैद्य को यदि निदान करना न आये और रोगी पथ्यापथ्य का बराबर ख्याल न रखे तो रोग पूरा मिटता नहीं। इसी तरह भागवत का वक्ता यदि पूर्ण वैराग्यवान न हो और श्रोतापूर्ण भक्तिवाले न हों तो भागवत की कथा भवरोग की उत्तम औषधि होते हुए भी भवरोग का सम्पूर्ण नाश नहीं हो सकता।
भागवत के वक्ता और श्रोता को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करके सम्पूर्ण स्नेह, शान्ति एवं सद्भावना से युक्त होना चाहिए। ऐसे वक्ता और श्रोता ही भागवत का पूरा लाभ ले सकते हैं। जिसको विवेक नहीं है वह भव सागर में डूब मरता है।
निष्काम भक्ति ही भागवत शास्त्र का विषय है।प्रभु तो अन्तर्यामी है, उदार हैं और पूर्ण न्यायी है। इसीलिए प्रभु से कुछ मांगने की जरूरत नहीं है। हम सबके कल्याण के लिए जो जरूरी है, वह सब प्रभु स्वयं ही देने वाले हैं।
भागवत की कथा देवताओं को भी दुर्लभ है। भागवत कथा श्रवण करने से भक्ति, ज्ञान, वैराग्य की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। पितरों की शान्ति के लिए भागवत से बड़ा कोई अनुष्ठान नहीं है।
माहात्म्य के आखिरी में भगवान व्यास कहते हैं कि- भक्तों समय निकालकर भागवत की कथा अवश्य सुनो, मंगल होगा, परीक्षित इस बात के साक्षी है। उन्होंने कल्याण का कोई दूसरा साधन नहीं किया, केवल भगवत श्रवण करने से उनका सर्वविधि मंगल हुआ।
कल की कथा में – श्री भागवत जी की रचना, श्रीपरीक्षितजी का जन्म, राज्याभिषेक, श्राप और उनकी सभा में श्रीशुकदेवजी का आगमन। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।