शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से होती है अमृत वर्षा: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, आश्विनमास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। शरद पूर्णिमा की रात को चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होते हैं और उनकी किरणों से अमृत की वर्षा होती है। एक लोक कथा भी प्रसिद्ध है। एक साहूकार की छोटी पुत्री द्वारा शरद पूर्णिमा का व्रत और रात्रि जागरण करने से उसका मृत बालक जीवित हो गया। जिससे यह बात स्पष्ट हो गयी कि- सतयुग, त्रेता द्वापर ही नहीं आज भी शरद पूर्णिमा की रात में चन्द्रमा से अमृत वर्षण होता है।
जिसका लाभ पूरी प्रकृति को प्राप्त होता है। हम-आप साधक समाज को भी शरद पूर्णिमा की रात में भगवान की आराधना उपासना करके, इसका लाभ लेना चाहिये। शरद पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और वो यह पूछती हैं कि- ” को जागृति ” कौन जाग रहा है। जो रात में जाकर माँ  लक्ष्मी और भगवान की विष्णु की पूजा करते हैं,  उनके घर में सुख समृद्धि आती है।
शरद पूर्णिमा की रात को चाँद की रोशनी में अपने ठाकुर जी को विराजमान करना, उनके सम्मुख खीर का प्रसाद पधराना,बारह बजे रात तक भजन कीर्तन करना चाहिये।12 बजे रात्री में ठाकुर जी की आरती करना और उत्सव आनन्दपूर्वक खीर का प्रसाद लेना और ठाकुर जी को यथा स्थान विराजमान करना, होता है। अगर यह सम्भव न हो तो समीप के मन्दिर में जहां उत्सव हो रहा हो शामिल होने का विधान है।
शरद पूर्णिमा की रात को भगवान् श्री कृष्ण ने श्री वृंदावन धाम में महारास किया था। इसीलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं। यह श्री कृष्ण से मिलाने वाली रात है। शरद पूर्णिमा की रात में महारास का पद, कीर्तन, भजन विशेष रूप से करना चाहिए। शरद पूर्णिमा भगवान का रासोत्सव का दिन है। इसलिए भगवान का विशेष श्रृंगार करना चाहिए।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
Latest News

27 October 2026 Ka Panchang: मंगलवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Panchang 27 October 2026: 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है. इस दिन अशून्य...

More Articles Like This

Exit mobile version