Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, दो वंश इस संसार में बड़े महिमामण्डित हुए, पहला सूर्यवंश जिसमें भगवान राम का अवतार हुआ। प्रभु श्री राम ने अपने मंगलमय चरित्र से समाज में मर्यादा का स्थापना किया। आज समाज के अन्दर जो छोटे-बड़े, भाई-बन्धु , पिता-पुत्र की मर्यादा है। इसकी स्थापना श्रीराम चरित्र के द्वारा हुई।
श्रीमद्भागवत महापुराण के नवम स्कन्ध में कुल चौबीस अध्याय हैं, प्रारम्भ के बारह अध्याय में सूर्यवंश और भगवान राम की कथा बताया। और नवम स्कन्ध उत्तरार्ध के बारह अध्याय में चन्द्रवंश और भगवान श्रीकृष्ण की कथा बताया। जहां भगवान राम के द्वारा समाज में मर्यादा की स्थापना हुई, वहीं भगवान श्री कृष्ण के द्वारा पूरे संसार को
श्रीमद्भगवद्गीता जैसे अध्यात्मविद्या का ज्ञान प्राप्त हुआ। पहले भगवान राम की कथा और फिर गीता के गायक की कथा सुनने के पीछे संतों का भाव है कि हमारे जीवन में सबसे पहले मर्यादा आवश्यक है।ज्ञान, विज्ञान, भक्ति, उपासना तो इसके बाद की ही बात है। अगर पात्र ही अच्छा न हो तो कुछ भी जीवन में टिकने वाला नहीं है और पात्रता तो मर्यादा से आती है।
कल्याण मार्ग पर चलने के लिए सबसे पहली बात है हम श्रेष्ठ मानव बनें, हमारा दिव्य चरित्र हो, तो ज्ञान, वैराग्य, भक्ति और यहां तक की ईश्वर की प्राप्ति भी सम्भव और सार्थक है। प्रथम श्री राम कथा सुनाया,इसके बाद भगवान परशुराम की कथा, श्री बलराम जी महाराज का अवतार, फिर भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य मथुरा में हुआ और गोकुल में भगवान का प्राकट्य उत्सव मनाया गया। कल की कथा में बाललीला और गोवर्धन पूजा की कथा होगी। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।