Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, एक महान संत के जीवन का अनुभव वे कहते हैं कि मेरे जीवन में एक ऐसी घटना घटी जिसका मेरे मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। मैं काशी के रास्ते में जा रहा था तो बंदर मेरे पीछे पड़े, मैं भाग रहा था और बंदर मेरे पीछे-पीछे सताते हुए आ रहे थे। एक स्वामी जी मिले रास्ते में, उन्होंने मुझे कहा- देखो सामना करो, भागो मत, नहीं तो वे और सतायेंगे।
स्वामी जी की बात सुनकर मैंने बंदर का सामना किया। जैसे ही मुड़कर सामना किया, वे बंदर भाग गये। उस छोटी सी घटना ने मेरे मन पर इतना प्रभाव डाला, तब से मैंने एक मंत्र मन में ठान लिया कि भगोड़ापन कोई समस्या का समाधान नहीं है। पलायन बाद समस्या का समाधान नहीं है, डटकर सामना करना चाहिये। समस्या, समस्या ही नहीं है, हम समस्या से भाग रहे हैं यही समस्या है। हम समस्या से मुख मोड़ लेते हैं यही सबसे बड़ी समस्या है।
समस्या चाहे किसी प्रकार की हो। समस्या कोई समस्या नहीं है, उन समस्याओं की उपेक्षा करने की जो वृत्ति बन गई है यही सबसे बड़ी समस्या है। जब दुर्जनता का सामना नहीं करते सज्जन, तो दुर्जनता और मजबूत होती है संसार में। दुर्जनता को बढ़ावा भगोड़ी सज्जनता ही देती है। सज्जनता के भागने के कारण ही दुर्जनता पलती है। समाज को दुर्जनों की दुर्जनता जितना नुकसान नहीं करती उतना नुकसान सज्जनों की निष्क्रियता से होता है। बहुत सुन्दर प्रश्न करते हैं व्यास जी कि व्यक्ति गुणवान भी हो, वीर्यवान भी हो, ऐसा चरित्र कौन सा है? देवर्षि? मुझे ऐसे चरित्र के बारे में बताइये।
जिसको मैं शब्दवद्ध करूं। संसार को आदर्श जीवन के लिए मार्गदर्शन मिले। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के लिए तैयार किया। अब देखिये, जो सज्जन है भीष्म, द्रोण, कर्ण इनको पहले समाप्त करवाया और दुर्योधन को सबसे अन्त में। श्रीकृष्ण का दर्शन है कि भले ही ये लोग सज्जन हैं लेकिन जो सज्जनता दुर्जनता की रक्षा कर रही हो, वह सज्जनता पहले मिटाने योग्य है।सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।