Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, ईश्वर की उपासना रिद्धि-सिद्धि के लिए नहीं हृदय की शुद्धि के लिए करो। प्रभु को खुश रखने का लक्ष्य रखकर ही प्रत्येक काम करो। हृदय यदि हमेशा भगवद् भाव में ही द्रवित रहता है तो पाप के विकार नष्ट होते हैं। प्रभु को राजी रखने के लिए की गई प्रत्येक व्यावहारिक प्रवृत्ति भी प्रभु की भक्ति ही है।
जिस तरह धन कमाने के लिए पसीना बहाते हो, उसी तरह परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भी पसीना बहाओ। जीव ईश्वर के साथ जैसा सम्बन्ध बांधता है, वैसा सम्बन्ध ईश्वर टिकाए रखता है। कामनाओं को प्रभु के साथ जोड़ दो, निष्काम बन जाओगे। जीवन में परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य बनाओ।
जीवन रूपी गाड़ी में यदि जीव मुसाफिर है, तो ईश्वर ड्राइवर है।भगवान भोग के नहीं भावना के भूखे हैं। प्रभु धन नहीं हृदय का प्रेम मांगते हैं। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।