एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के तीसरे दिन बुधवार को उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक अवसरों के द्वार खोल सकता है. समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में डीडीएन के इंटरनेशनल मार्केटिंग के सीनियर डायरेक्टर प्रेमचंद अकेला ने भारत की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि एआई का विकास देश की आर्थिक प्रगति को नई गति दे सकता है और भविष्य में बड़े स्तर पर फायदे पहुंचाएगा.
रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र पर भी असर
उन्होंने आगे कहा कि एआई के विकास के लिए भारत सरकार और देश के नागरिक सही दिशा में कदम उठा रहे हैं. मेजर जनरल सुजीत शिवाजी पाटिल ने आईएएनएस से कहा कि एआई हर क्षेत्र में प्रभाव डालने वाला है. यह आईएसआर (सूचना, निगरानी और टोही) पर असर डालेगा, साथ ही हमारे सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करेगा और दुश्मन के सिस्टम पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव डालने की क्षमता भी प्रदान करेगा, जिससे रणनीतिक बढ़त हासिल की जा सकेगी.
हेल्थकेयर और रोजगार में बदलाव
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की एमडी और सीनियर पार्टनर प्रियंका अग्रवाल ने कहा कि यह समिट भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेगी. उनके अनुसार एआई फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है, जिससे सेवाएं अधिक किफायती और सुलभ होंगी. उन्होंने यह भी कहा कि एआई कुछ नौकरियों को प्रभावित जरूर करेगा, लेकिन इसके साथ बड़ी संख्या में नए रोजगार भी पैदा होंगे और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
भविष्य की समृद्धि में एआई की भूमिका
साइबल के सीईओ और सह-संस्थापक बीनू अरोड़ा ने कहा कि यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक है. उनका मानना है कि यह समिट ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है, और आने वाले समय में वही देश आगे बढ़ेंगे जो एआई क्षमताओं को मजबूत करेंगे.
जिम्मेदार उपयोग की जरूरत
ईसी परिषद के अध्यक्ष और सीईओ जय बाविसी ने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां बड़े भाषा मॉडल (LLM), तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत उपलब्धता और अंग्रेजी जानने वाली बड़ी आबादी मौजूद है. उनके अनुसार इस समिट के आयोजन से देश में एआई को लेकर चर्चा और जागरूकता दोनों बढ़ेंगी. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का सही और जिम्मेदार उपयोग जरूरी है, क्योंकि गलत तरीके से लागू होने पर इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.

