कैंसर के शुरुआती रिस्क पैटर्न का पता लगाने में AI सक्षम, अध्ययन में हुआ खुलासा

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से अपनी जगह बना रही है और अब यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की पहचान में भी अहम भूमिका निभाने लगी है. एक नए अध्ययन में सामने आया है कि एआई की मदद से त्वचा कैंसर के खतरनाक रूप मेलानोमा के शुरुआती जोखिम का सटीक अंदाजा लगाया जा सकता है, जिससे समय रहते इलाज की संभावना बढ़ सकती है.

यह अध्ययन स्वीडन की वयस्क आबादी से जुड़े बड़े स्तर के पंजीकृत आंकड़ों पर आधारित है. शोध में उम्र, लिंग, बीमारियों का इतिहास, दवाओं का उपयोग और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया, जिससे जोखिम का व्यापक विश्लेषण किया जा सके.

60 लाख लोगों के डेटा से मिला बड़ा संकेत

अध्ययन में 60 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इनमें से लगभग 0.64 प्रतिशत लोगों में पांच वर्षों के भीतर मेलानोमा विकसित हुआ. शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि स्वास्थ्य प्रणाली में पहले से मौजूद आंकड़ों का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो उन लोगों की पहचान पहले ही की जा सकती है, जिन्हें भविष्य में इस बीमारी का ज्यादा खतरा हो सकता है.

एआई मॉडल ने दिखाई बेहतर सटीकता

शोध में अलग-अलग एआई मॉडल की तुलना की गई. इसमें पाया गया कि उन्नत मॉडल लगभग 73 प्रतिशत मामलों में सही पहचान करने में सक्षम रहा. वहीं, केवल उम्र और लिंग के आधार पर यह सटीकता करीब 64 प्रतिशत ही रही. इससे यह स्पष्ट होता है कि जब अधिक व्यापक जानकारी—जैसे बीमारी का इतिहास, दवाएं और सामाजिक कारक—को शामिल किया जाता है, तो जोखिम का आकलन और ज्यादा सटीक हो जाता है.

उच्च जोखिम वाले समूह की पहचान संभव

अध्ययन में यह भी सामने आया कि एआई की मदद से ऐसे छोटे समूहों की पहचान की जा सकती है, जिनमें अगले पांच वर्षों में मेलानोमा होने का खतरा 33 प्रतिशत तक हो सकता है. यह जानकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

विशेषज्ञों की राय: इलाज में बड़ा बदलाव संभव

शोध से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान कर लक्षित जांच की जाए, तो बीमारी की निगरानी अधिक प्रभावी हो सकती है. इससे स्वास्थ्य संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा. विशेषज्ञों ने इसे व्यक्तिगत चिकित्सा की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है, जहां हर व्यक्ति के जोखिम के अनुसार इलाज और जांच की योजना बनाई जा सकेगी.

अभी और शोध की जरूरत

हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले और अधिक शोध और नीतिगत निर्णयों की आवश्यकता है. इसके बावजूद, यह अध्ययन इस बात का संकेत देता है कि भविष्य में एआई आधारित तकनीक कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान और रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकती है.

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