Crude Oil Price: अमेरिका-ईरान तनाव से उछले कच्चे तेल के दाम, भारत में पेट्रोल-डीजल और LPG महंगी होने की बढ़ी आशंका

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Crude Oil Price: मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य घटनाक्रम के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया. इस तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब 3.5 प्रतिशत बढ़कर 78.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया और 79 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ता दिखाई दिया. वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 3.4 प्रतिशत की तेजी के साथ 73.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ी है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है.

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता

तनाव के बीच ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को अगले आदेश तक बंद किए जाने का दावा किया गया. हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सभी वैध जहाजों के लिए खुला है और नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है. सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाएं क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. साथ ही यह भी बताया गया कि क्षेत्र में हालिया घटनाओं के जवाब में सैन्य कार्रवाई का नया दौर शुरू किया गया है.

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से का परिवहन इसी रास्ते से होता है. ऐसे में यदि यहां किसी तरह का व्यवधान आता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है.

शांति समझौते के बावजूद फिर बढ़ा तनाव

पिछले महीने 17 जून को फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने को लेकर समझौता हुआ था. इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ना था. हालांकि ताजा घटनाक्रम के बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है.

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो सरकारी तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में भविष्य में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा भारत अपनी रसोई गैस (LPG) की बड़ी जरूरत भी खाड़ी देशों से पूरी करता है. यदि क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित होती है, तो एलपीजी की उपलब्धता और आयात लागत पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि कीमतों या आपूर्ति से जुड़ा कोई भी अंतिम फैसला सरकार और संबंधित कंपनियों की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा.

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