July Retail Inflation: देश में महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है. रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई चीजों के दाम बढ़ने का असर अब खुदरा महंगाई के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है. जुलाई में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45% हो गई, जबकि जून में यह 4.38% थी. महंगाई में इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में आया उछाल माना जा रहा है. जुलाई की 4.45% खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही. यानी महंगाई का स्तर केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से ज्यादा है, जिससे आने वाले समय में कीमतों को लेकर नजरें बनी रहेंगी.
कोर महंगाई में नहीं हुआ बड़ा बदलाव
जुलाई के दौरान कोर महंगाई दर 3.8% से 4.3% के दायरे में बनी रही. इस मोर्चे पर कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला. भोजन और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को छोड़ दें तो दूसरी वस्तुओं की कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं आई. इसे अर्थव्यवस्था के लिए कुछ राहत के तौर पर देखा जा रहा है.
BofA ने महंगाई को लेकर क्या अनुमान लगाया?
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म BofA Securities (Bank of America) ने आगे महंगाई को लेकर सावधानी बरतने का अनुमान जताया है. फर्म के मुताबिक, फिलहाल देश में महंगाई काफी हद तक नियंत्रण में दिखाई दे रही है, लेकिन मानसून की असमान स्थिति और अल-नीनो से जुड़े जोखिमों के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. अगर खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो इसका असर मौद्रिक नीति पर भी पड़ सकता है. BofA के अनुमान के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक कारोबारी साल 2027 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में कुल 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है.
जुलाई में किन चीजों के बढ़े दाम?
जुलाई में महंगाई बढ़ने के पीछे कई रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में आया उछाल जिम्मेदार रहा.
- प्याज, अदरक और लहसुन के दाम बढ़े हैं. मानसून के उतार-चढ़ाव और सप्लाई पर इसके असर को इसकी प्रमुख वजहों में माना जा रहा है.
- अंडा, चिकन और एडिबल ऑयल की कीमतों में तेजी के कारण खाद्य महंगाई बढ़कर 5.52% पर पहुंच गई.
- बाहर खाना भी महंगा हुआ है. रेस्टोरेंट और अकोमोडेशन से जुड़ी सेवाओं के चार्ज बढ़ने के चलते इस सेगमेंट की महंगाई जुलाई में 7.72% रही, जो जून में 6.91% थी.
- कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ट्रांसपोर्टेशन लागत पर पड़ा. इससे भी महंगाई पर दबाव बढ़ा और खुदरा महंगाई जून के 4.38% से बढ़कर जुलाई में 4.45% हो गई.
- जुलाई में पर्सनल केयर से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इस तरह जुलाई में खुदरा महंगाई में आया उछाल मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं और कुछ जरूरी सेवाओं की बढ़ती लागत से जुड़ा रहा, जबकि कोर महंगाई में बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला.