Low Petrol Price: देश में लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब सीधे लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है. वाहन चलाने से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक, हर जगह महंगाई का दबाव महसूस किया जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बीच भारत में भी ईंधन की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं. हालात ऐसे बन चुके हैं कि पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है. इससे आम लोगों के मासिक बजट पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है.
बीते 8 दिनों में तीन बार बढ़े पेट्रोल के दाम
पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पेट्रोल की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है. 15 मई को पेट्रोल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद 19 मई को 90 पैसे प्रति लीटर और फिर 23 मई को 87 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई. लगातार बढ़ती कीमतों के कारण अब देश के कई राज्यों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है. इससे वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है.
इन राज्यों में अब भी 100 रुपये से कम है पेट्रोल
जहां देश के कई हिस्सों में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं कुछ ऐसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी हैं जहां अभी भी पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सबसे कम पेट्रोल कीमत अरुणाचल प्रदेश में दर्ज की गई है, जहां पेट्रोल लगभग 97.70 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. वहीं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पेट्रोल की कीमत करीब 88.66 रुपये प्रति लीटर बताई गई है. कम टैक्स दरों की वजह से इन क्षेत्रों में अन्य राज्यों की तुलना में लोगों को कुछ राहत मिल रही है.
सबसे ज्यादा कहां पहुंची कीमत?
रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा पेट्रोल कीमत आंध्र प्रदेश में दर्ज की गई है, जहां पेट्रोल की कीमत 117.88 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है. इसके अलावा तेलंगाना, केरल, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में भी पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के ऊपर पहुंच चुकी हैं.
आखिर अलग-अलग राज्यों में क्यों बदलती है कीमत?
पेट्रोल की कीमतों में अंतर का सबसे बड़ा कारण अलग-अलग राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स माना जाता है. इसके अलावा परिवहन लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च और डीलर कमीशन भी कीमतों को प्रभावित करते हैं. राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले करों के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में पेट्रोल के दाम अलग दिखाई देते हैं. इसी वजह से कहीं लोगों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है तो कहीं कुछ राहत देखने को मिलती है.
अंतरराष्ट्रीय कारणों का भी दिख रहा असर
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के आखिर से अब तक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं को बड़ी वजह माना जा रहा है. फिलहाल बढ़ती ईंधन कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है और लोग आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
यह भी पढ़े: तेल की धार, जेब पर वार: 12 दिनों में महंगाई ने तोड़ी आम आदमी की कमर, देखें पूरा रिपोर्ट कार्ड