30 सितंबर तक 70 अरब डॉलर पहुंच सकता है FCNR(B) डिपॉजिट: SBI Report

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष FCNR(B) डिपॉजिट योजना को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. एसबीआई रिसर्च की सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक भारत में FCNR(B) डिपॉजिट 65 से 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकते हैं, जबकि कुल जमा राशि 80 से 85 अरब डॉलर के दायरे में रहने का अनुमान है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती रुझान इस योजना को लेकर मजबूत निवेशकों की रुचि दिखा रहे हैं.

17 जुलाई तक 20 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह

रिपोर्ट के अनुसार, 17 जुलाई 2026 तक कुल 20 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया है. इसमें 17.4 अरब डॉलर का सबसे बड़ा योगदान FCNR(B) डिपॉजिट का रहा. इससे साफ है कि विदेशी मुद्रा जमा योजना को निवेशकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है.

45 दिनों में 2013 का रिकॉर्ड पार

एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि केवल 45 दिनों के भीतर FCNR(B) डिपॉजिट 2013 में दर्ज 26 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुके हैं. उनके मुताबिक, मौजूदा योजना को निवेशकों से उम्मीद से अधिक समर्थन मिला है.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निभा रहे सबसे बड़ी भूमिका

RBI के आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई 2026 तक 17.4 अरब डॉलर के FCNR(B) डिपॉजिट जुटाए जा चुके हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) इस अभियान को आगे बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और सबसे अधिक जमा राशि जुटाने में सफल रहे हैं.

अगस्त और सितंबर में और बढ़ सकता है निवेश

रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त और सितंबर 2026 में मैच्योर होने वाली मौजूदा FCNR(B) जमाओं का बड़ा हिस्सा नई योजना के तहत अधिक ब्याज दरों का लाभ लेने के लिए दोबारा रिन्यू कराया जा सकता है. इससे आने वाले महीनों में FCNR(B) डिपॉजिट में और बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है.

10 अरब डॉलर अतिरिक्त जुटने का अनुमान

एसबीआई रिसर्च ने अपने प्रारंभिक अनुमान में कहा है कि आधारभूत अनुमान के अलावा करीब 10 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि भी जुटाई जा सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, यह अतिरिक्त पूंजी मुख्य रूप से उन देशों से आने की संभावना है, जहां कर संबंधी रियायतें उपलब्ध हैं.

2013 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए 45 दिनों में जुटाई गई कुल राशि, वर्ष 2013 में तीन महीनों के दौरान जुटाई गई कुल राशि से भी अधिक हो चुकी है. इससे इस विशेष योजना की सफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

मजबूत पूंजी प्रवाह के बावजूद रुपये पर सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय बाजार अब भी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि इतने मजबूत पूंजी प्रवाह का विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) पर क्या असर पड़ रहा है और इतनी बड़ी पूंजी आने के बावजूद रुपया अपेक्षाकृत कमजोर क्यों बना हुआ है.

विदेशी ग्राहकों के नेटवर्क का मिल रहा फायदा

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक केवल जमा राशि जुटाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न देशों में फैले भरोसेमंद और उच्च साख वाले ग्राहकों के साथ अपने मजबूत संबंधों का लाभ उठाकर अतिरिक्त पूंजी प्रवाह सुनिश्चित कर रहे हैं. इसके साथ ही बैंक ऑनशोर और ऑफशोर रणनीतियों के संतुलित मिश्रण के जरिए इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं.

पश्चिम एशिया तनाव के बाद RBI के हस्तक्षेप पर टिप्पणी

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में RBI का हस्तक्षेप कुछ हद तक अनियमित रहा है और पूरी क्षमता के साथ नहीं किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, रुपया पहले बाहरी झटकों को अपने ऊपर लेकर अर्थव्यवस्था की रक्षा करने वाले ‘शॉक एब्जॉर्बर’ की भूमिका निभाता था, लेकिन अब यह क्षमता कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है. ऐसे में रुपये की अंतर्निहित मजबूती बनाए रखना जरूरी है, ताकि वह प्रतिस्पर्धात्मकता खोए बिना वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके.

वैश्विक जोखिमों पर भी जताई चिंता

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक व्यापार, आपूर्ति एवं मूल्य श्रृंखलाओं में बढ़ता तनाव, भू-राजनीतिक जोखिम और असंतुलित पूंजी प्रवाह आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बने रह सकते हैं. ऐसे में विदेशी मुद्रा प्रबंधन और पूंजी प्रवाह की रणनीति को संतुलित बनाए रखना आवश्यक होगा.

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