डॉलर पर भारी पड़ा रुपया, 10 पैसे की बढ़त, RBI के फैसले का दिखा असर

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में करीब 10 पैसे की बढ़त दर्ज की गई. रुपया 92.57 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि पिछला बंद स्तर 92.66 था. यह मजबूती ऐसे समय आई है जब बाजार में कई घरेलू और वैश्विक कारक एक साथ प्रभाव डाल रहे हैं.

RBI की डेडलाइन का बाजार पर असर

इस तेजी के पीछे प्रमुख कारण भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को दी गई आर्बिट्रेज पोजीशन खत्म करने की समयसीमा को माना जा रहा है. 10 अप्रैल बैंकों के लिए ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड बाजार में अपनी अतिरिक्त पोजीशन समाप्त करने की आखिरी तारीख है.

मार्च में RBI ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि बैंकों की रुपये में नेट ओपन पोजीशन हर कारोबारी दिन के अंत में 100 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए. कई बैंकों ने इस सीमा को लागू करने के लिए समय बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय बैंक ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे बैंकों को अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन कम करनी पड़ी.

बाजार में ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति

विश्लेषकों के अनुसार, जब तक RBI की ओवरनाइट पोजीशन लिमिट को लेकर और स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक बाजार सतर्क बना रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि डेडलाइन के बाद रुपये में तेज गिरावट की आशंका को शायद बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है और वास्तविक स्थिति उतनी गंभीर नहीं हो सकती.

कच्चे तेल की कीमतें भी बनीं अहम फैक्टर

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं. ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 1.13 प्रतिशत अधिक है. वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 1 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 99.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

हालांकि इससे पहले तेल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई थी और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया था, लेकिन हालिया तेजी ने फिर से बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

घरेलू बाजार में भी दिखा असर

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल के वायदा सौदों में भी तेजी देखी गई. 20 अप्रैल डिलीवरी वाले क्रूड ऑयल ने इंट्रा-डे में 9,222 रुपए का उच्च स्तर छुआ, जो 3.23 प्रतिशत या 289 रुपए की बढ़त को दर्शाता है. यह संकेत देता है कि वैश्विक रुझान का असर घरेलू बाजार पर भी स्पष्ट रूप से पड़ रहा है.

RBI गवर्नर का बयान

इस हफ्ते की शुरुआत में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि बैंकों के विदेशी मुद्रा पोजीशन पर लगाए गए प्रतिबंध और क्लाइंट्स को नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड देने पर रोक अस्थायी कदम हैं, जिनका उद्देश्य बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करना है. उन्होंने यह भी बताया कि हाल के हफ्तों में विदेशी मुद्रा बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसका एक कारण बैंकों द्वारा किए गए आर्बिट्रेज ट्रेड्स भी हैं.

यह भी पढ़े: पेट्रोल-डीजल और LPG के नए रेट जारी. जानिए आज आपके शहर में क्या है ताजा भाव

Latest News

क्या है बहादुर और कायर का फर्क? CMD उपेंद्र राय ने प्रयागराज में समझाया, बताया इंसानियत का गणित

प्रयागराज की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरती आज न केवल ज्ञान के एक नए केंद्र ‘कैलाश गौतम स्मृति पुस्तकालय’ की...

More Articles Like This

Exit mobile version