Rupee vs Dollar: रुपए में दमदार वापसी, डॉलर के मुकाबले मजबूती से खुला; बाजार में लौटी रौनक

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मंगलवार को मजबूती के साथ खुला है. शुरुआती कारोबार में रुपया 93.64 के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले सत्र के रिकॉर्ड लो 93.98 से बेहतर स्थिति है. इस मजबूती की मुख्य वजह मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत माने जा रहे हैं, जिससे बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली है.

मध्य पूर्व में तनाव कम होने से बाजार को राहत

रुपये में आई इस तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान अहम माना जा रहा है. ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया गया है. इस खबर के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा और बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला.

हालांकि, इस मामले में पूरी स्पष्टता नहीं है. ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद-बघर गालिबफ ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार किया है, जिससे स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है.

कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता की बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें अब भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और रुपये पर दबाव पड़ता है. सोमवार को भी मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के चलते रुपया करीब 0.37 प्रतिशत कमजोर हुआ था. तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की धारणा को नकारात्मक किया है.

महंगाई और ग्रोथ पर पड़ सकता है असर

विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा. इससे आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है और रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है. एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, मौजूदा मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है. जब तक वैश्विक तनाव और ऊर्जा की कीमतें नियंत्रण में नहीं आतीं, तब तक रुपये की मजबूती टिकाऊ नहीं मानी जा सकती.

आगे क्या रहेगा रुख? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया 93.25 से 94.25 के दायरे में ही बना रह सकता है. यानी फिलहाल बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना कम है, लेकिन स्थिति पूरी तरह स्थिर भी नहीं है. विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपया पूरी तरह से वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा. अगर मध्य पूर्व में तनाव और कम होता है, तो रुपये में और मजबूती देखने को मिल सकती है.

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