अगले हफ्ते फेड मिनट्स, RBI संकेत और FII की चाल तय करेगी बाजार की दिशा

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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पिछले सप्ताह बाजार में आई तेज गिरावट के बाद अब निवेशकों की निगाह अगले सप्ताह आने वाले घरेलू और वैश्विक संकेतों पर टिकी है. इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स, भारतीय रिजर्व बैंक के संकेत, आईटी सेक्टर की स्थिति, सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां शामिल हैं. जो भारतीय शेयर बाजार की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

पिछले हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार (13 फरवरी) को भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुए. कमजोर वैश्विक संकेतों और एआई के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर की चिंता से बाजार दबाव में रहा. इस दौरान 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,048 अंक यानी 1.25 प्रतिशत गिरकर 82,626.76 पर बंद हुआ. तो वहीं एनएसई निफ्टी 336 अंक यानी 1.30 प्रतिशत गिरकर 25,471.10 पर बंद हुआ.

निफ्टी के अहम सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तर

ब्रोकरेज फर्म चॉइस ब्रोकिंग के मुताबिक, निफ्टी के लिए 25,700 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस साबित हो सकता है. जबकि 25,300 के आसपास सपोर्ट दिखाई दे रहा है. यदि सूचकांक 25,300 के नीचे फिसलता है तो गिरावट और तेज हो सकती है. वहीं 25,700 के ऊपर निकलने पर बाजार में दोबारा तेजी का रुख बन सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा अस्थिर माहौल में निवेशकों को सख्त स्टॉप लॉस के साथ सीमित दायरे में ट्रेडिंग की रणनीति अपनानी चाहिए.

फेड और आरबीआई मिनट्स पर रहेगी नजर

अगले सप्ताह 18 फरवरी को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हालिया नीति बैठक के मिनट्स जारी होंगे. जिन पर बाजार की खास नजर रहेगी. इसके अलावा अमेरिका की जीडीपी के आंकड़े भी आने वाले हैं. भारत में 20 फरवरी को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स जारी किए जाएंगे. इस हफ्ते भारी बिकवाली के दबाव के बाद आईटी सेक्टर पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगा.

आईटी सेक्टर पर दबाव

सप्ताह के दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 8 प्रतिशत गिरा. जिससे यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस और विप्रो जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों पर काफी दबाव रहा. निवेशकों को आशंका है कि जनरेटिव और एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं की मांग घट सकती है. जिसका असर आईटी कंपनियों की भविष्य की आय पर पड़ सकता है.

कमोडिटी और FII गतिविधियां भी अहम

इसी के साथ वैश्विक कमोडिटी बाजार की चाल पर भी नजर बनी रहेगी. सोना और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद अब स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं. वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार के रुख को प्रभावित करेंगी. फरवरी में अब तक एफआईआई अधिकांश सत्रों में शुद्ध खरीदार रहे हैं. और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद निवेशकों का भरोसा कुछ मजबूत हुआ है.

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