केंद्रीय बजट 2027 में MSME सेक्टर पर फोकस, वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए बड़े ऐलान

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Budget 2027: एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय बजट 2026-27 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को देश की आर्थिक विकास रणनीति के केंद्र में रखा गया है. सरकार ने कई ऐसे उपायों की घोषणा की है. जिनसे छोटे उद्योगों को विस्तार करने, वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बेहतर जुड़ाव बनाने में मदद मिलेगी. बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि एमएसएमई क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन की रीढ़ है.

अर्थव्यवस्था में MSME का बड़ा योगदान

वर्तमान में एमएसएमई भारत के कुल विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) उत्पादन का लगभग 35.4 प्रतिशत हिस्सा देते हैं. देश के कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी करीब 48.58 प्रतिशत है. और जीडीपी में इनका योगदान 31.1 प्रतिशत है. देश में 7.47 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां हैं. जो लगभग 32.82 करोड़ लोगों को रोजगार देती हैं. कृषि के बाद यह क्षेत्र सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाला क्षेत्र है. बजट में तीन मुख्य कर्तव्य (लक्ष्य) तय किए गए हैं. जिनका उद्देश्य तेजी से विकास करना, लोगों की उम्मीदों को पूरा करना और देश के अलग-अलग क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाना है.

पूंजी और विस्तार के लिए बड़े कदम

पहले लक्ष्य के तहत सरकार ने एमएसएमई को सशक्त बनाने के लिए तीन प्रमुख कदमों का उल्लेख किया है — इक्विटी के रूप में पूंजी सहायता, नकदी की उपलब्धता बढ़ाना और पेशेवर मार्गदर्शन प्रदान करना. इक्विटी समर्थन को मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के विशेष एसएमई ग्रोथ फंड की घोषणा की गई है. जिसका उद्देश्य योग्य छोटे उद्योगों को विस्तार और विकास में सहायता देना है. इसके अतिरिक्त, वर्ष 2021 में शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत फंड में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ी जाएगी. ताकि एमएसएमई को आवश्यक जोखिम पूंजी उपलब्ध हो सके.

नकदी संकट दूर करने की पहल

30 नवंबर 2025 तक इस फंड ने 682 MSME को 15,442 करोड़ रुपए का निवेश समर्थन दिया है. नकदी की समस्या को हल करने के लिए सरकार ने बताया कि ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) के माध्यम से एमएसएमई के लिए 7 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है. अब केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया जाएगा कि वे MSME को भुगतान करने के लिए टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म का उपयोग करें.

ऋण और तरलता बढ़ाने की नई व्यवस्था

इसके अलावा सीजीटीएमएसई योजना के तहत इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए क्रेडिट गारंटी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी. सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) को टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा. जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को बेहतर डेटा मिलेगा और एमएसएमई को तेजी से तथा कम लागत पर ऋण प्राप्त हो सकेगा. साथ ही सरकार टीआरईडीएस से जुड़े बिलों को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज के रूप में बाजार में पेश करने की योजना बना रही है. जिससे तरलता (लिक्विडिटी) और बढ़ने की उम्मीद है.

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