मिडिल ईस्ट में जंग के बीच देश में नहीं होगी रसोई गैस की किल्लत, सरकार ने दिया ये आदेश

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में संकट के कारण सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत सरकार ने आपात अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए तेल रिफाइनरियों को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है, ताकि घरेलू रसोई गैस की किल्लत न हो.

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है. पिछले वर्ष देश में करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन कुकिंग गैस की खपत हुई थी. LPG प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होती है. देश की कुल LPG जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा होता है और इसमें से करीब 85-90% सप्लाई मिडिल ईस्ट से आती है.

सरकार के आदेश में कहा…

सरकार के आदेश में कहा गया है कि सभी तेल रिफाइनरियां अपने पास उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल LPG बनाने में करें. साथ ही प्रोड्यूसर्स से कहा गया है कि वे LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन को सरकारी रिफाइनरियों को उपलब्ध कराएं, ताकि घरों तक सप्लाई जारी रहे.

सरकार ने कहा है कि गैस की सप्लाई मुख्य तौर पर सरकारी तेल कंपनियों, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को दी जाए, जो इसे घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं. जनवरी से अमेरिका से भारत में LPG का आयात शुरू हो गया है. भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने नवंबर 2025 में 2026 के अनुबंध वर्ष के लिए अमेरिकी खाड़ी तट से लगभग 2.2 मीट्रिक टन प्रति वर्ष एलपीजी आयात करने के लिए एक साल का अनुबंध किया है.

प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG बनाने में लगाने से कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन कम हो सकता है. इनमें अल्काइलेट्स भी शामिल हैं, जो पेट्रोल में मिलाया जाता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां हर महीने अल्काइलेट्स के कई कार्गो निर्यात करती रही हैं.

सरकार ने रिफाइनरियों को यह भी दिया निर्देश

सरकार ने रिफाइनरियों को यह भी निर्देश दिया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में न लगाएं और उन्हें LPG बनाने में प्राथमिकता दें. ट्रेड सूत्रों के अनुसार, प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG बनाने में लगाने से पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, क्योंकि पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसे उत्पादों की कीमत LPG से ज्यादा मिलती है.

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