Chronic Kidney Disease: कभी क्रॉनिक किडनी डिजीज को बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. कम उम्र के लोगों में भी किडनी से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं. आधुनिक जीवनशैली, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और कुछ दवाओं के अनुचित इस्तेमाल जैसे कारक किडनी की सेहत पर भारी पड़ सकते हैं.
इस बीमारी की सबसे चिंताजनक बात यह है कि शुरुआती चरणों में कई लोगों को स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते. किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है और जब थकान, सूजन या पेशाब में बदलाव जैसे संकेत स्पष्ट दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी आगे बढ़ चुकी हो सकती है. ऐसे में सवाल है कि आखिर 20, 30 और 40 साल की उम्र में किडनी की समस्या क्यों बढ़ सकती है और शरीर कौन से संकेत देता है? आइए विस्तार से जानते हैं.
युवाओं में क्यों बढ़ सकता है क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा?
क्रॉनिक किडनी डिजीज के पीछे कोई एक कारण नहीं होता. कई स्वास्थ्य समस्याएं और जीवनशैली से जुड़े कारक धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कम उम्र में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों का बढ़ना विशेष चिंता का विषय है.
डायबिटीज
भारत में डायबिटीज एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है. लंबे समय तक ब्लड शुगर अनियंत्रित रहने पर किडनी के भीतर मौजूद छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. इससे किडनी की खून को फिल्टर करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. युवा उम्र में डायबिटीज होने और उसका सही नियंत्रण न होने पर भविष्य में किडनी रोग का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए ब्लड शुगर की नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उसका नियंत्रण जरूरी है.
हाई ब्लड प्रेशर
अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप किडनी की रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है और समय के साथ उनकी कार्यक्षमता प्रभावित कर सकता है. समस्या यह है कि हाई ब्लड प्रेशर भी कई बार लंबे समय तक स्पष्ट लक्षण नहीं देता. ऐसे में नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है.
पानी और तरल पदार्थों की कमी
शरीर में पर्याप्त तरल न होने से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है. खासकर गर्म मौसम, भारी शारीरिक मेहनत या अधिक पसीना आने की स्थिति में पर्याप्त तरल लेना जरूरी है. हालांकि हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत एक जैसी नहीं होती. किडनी या हृदय रोग से जूझ रहे कुछ मरीजों को तरल की मात्रा सीमित रखने की सलाह भी दी जा सकती है. इसलिए जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण है.
किडनी रोग के अन्य कारण
किडनी की सेहत को प्रभावित करने वाले कई अन्य कारक भी हो सकते हैं. इनमें जीवनशैली और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं.
- लंबे समय तक तनाव
- मोटापा और अधिक वजन
- नमक का अधिक सेवन
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- नींद की खराब आदतें
- मेटाबॉलिक संबंधी विकार
- अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन
- कुछ दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक या अनुचित इस्तेमाल
- बार-बार डिहाइड्रेशन की स्थिति
खासतौर पर दर्द निवारक दवाओं का बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है. कुछ दवाएं किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए लंबे समय तक स्वयं दवा लेना उचित नहीं है.
क्रॉनिक किडनी डिजीज के लक्षण
क्रॉनिक किडनी डिजीज शुरुआती अवस्था में स्पष्ट संकेत न दे, लेकिन बीमारी बढ़ने पर शरीर में कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं. इन लक्षणों को लगातार महसूस होने पर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
- लगातार थकान महसूस होना
- पैरों या टखनों में सूजन
- पेशाब की मात्रा, रंग या आवृत्ति में बदलाव
- आंखों के आसपास सूजन
- भूख कम लगना
- मांसपेशियों में ऐंठन
- हाई ब्लड प्रेशर
इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में क्रॉनिक किडनी डिजीज की पुष्टि नहीं करता. ऐसे संकेत कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं. लेकिन लक्षण लगातार बने रहें, बढ़ते जाएं या व्यक्ति को पहले से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर हो, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है.
समय पर जांच क्यों है जरूरी?
क्रॉनिक किडनी डिजीज का जल्दी पता लगने पर इसकी प्रगति को धीमा करने के लिए चिकित्सकीय कदम उठाए जा सकते हैं. डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, पेशाब की जांच और अन्य परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं. विशेष रूप से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या किडनी रोग की पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देना चाहिए. बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट, दर्द निवारक दवाएं या अन्य दवाएं लंबे समय तक लेने से भी बचना चाहिए.
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है. किडनी से जुड़े लक्षण, लगातार सूजन, पेशाब में बदलाव या अन्य स्वास्थ्य समस्या होने पर योग्य डॉक्टर से जांच कराएं.
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