Bhramari Pranayama: सिर्फ 2 मिनट का भ्रामरी प्राणायाम, तनाव और बेचैनी से राहत में हो सकता है मददगार

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Bhramari Pranayama Benefits: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, लगातार तनाव और कई तरह की जिम्मेदारियों के बीच मन को शांत रखना आसान नहीं है. ऐसे में योग और प्राणायाम मानसिक सुकून पाने का एक आसान तरीका हो सकता है. भ्रामरी प्राणायाम भी ऐसी ही सरल तकनीक है, जिसके नियमित अभ्यास से मन को शांत रखने, तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. भ्रामरी प्राणायाम का नाम भौंरे से जुड़ा है. इसका अभ्यास करते समय सांस छोड़ने के दौरान गुनगुनाहट जैसी आवाज निकाली जाती है, जो भौंरे की आवाज के समान होती है. इसी वजह से इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता है.

भ्रामरी प्राणायाम कैसे करें?

भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले किसी शांत और हवादार जगह पर आराम से बैठ जाएं. आप पद्मासन, सुखासन या किसी भी ऐसी स्थिति में बैठ सकते हैं जिसमें शरीर को ज्यादा परेशानी न हो.

  • सबसे पहले अपनी आंखें बंद करके शरीर को ढीला छोड़ें और सामान्य रूप से सांस लें.
  • अब दोनों हाथों को चेहरे के पास लाएं और अंगूठों से कानों के बाहरी हिस्से को हल्के से बंद करें.
  • अपनी बाकी उंगलियों को आंखों और माथे के आसपास आराम से रखें. आंखों पर किसी तरह का दबाव न डालें.
  • अब नाक से धीरे-धीरे गहरी सांस लें.
  • सांस छोड़ते समय मुंह बंद रखें और गले से ‘म…’ जैसी धीमी गुनगुनाहट निकालें.
  • इस दौरान अपनी आवाज और सांस पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें.
  • सांस पूरी तरह बाहर निकलने के बाद दोबारा धीरे से सांस लें और इसी प्रक्रिया को दोहराएं.
  • शुरुआत में कुछ चक्र ही करें और सहज महसूस होने पर धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.

भ्रामरी करते समय आवाज को बहुत तेज करने या सांस को जबरदस्ती रोकने की जरूरत नहीं है. अभ्यास आराम से और अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए.

मन को शांत करने में मददगार

आयुष मंत्रालय के अनुसार, भ्रामरी प्राणायाम दिमाग को शांत करने में मदद कर सकता है. इसके अभ्यास से तनाव और मानसिक बेचैनी को कम करने में मदद मिलती है. गुस्से को नियंत्रित करने और मन को स्थिर रखने में भी इसका अभ्यास उपयोगी माना जाता है. नियमित अभ्यास के दौरान सांस और गुनगुनाहट पर ध्यान लगाने से एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इससे मानसिक थकान कम करने और शरीर व दिमाग को आराम देने में भी सहायता मिल सकती है.

बच्चों और छात्रों के लिए भी उपयोगी

प्राणायाम योग की प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ‘प्राण’ का अर्थ जीवन शक्ति या ऊर्जा और ‘आयाम’ का अर्थ विस्तार या नियंत्रण माना जाता है. योग दर्शन में प्राणायाम को अष्टांग योग का चौथा चरण बताया गया है. भ्रामरी का अभ्यास ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि बच्चों और छात्रों के लिए भी इसे उपयोगी अभ्यास माना जाता है. पढ़ाई के दौरान ध्यान लगाने और मानसिक रूप से शांत रहने में इससे मदद मिल सकती है.

भ्रामरी प्राणायाम करते समय इन बातों का रखें ध्यान

भ्रामरी प्राणायाम सरल अभ्यास है, लेकिन इसे करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं. इसका अभ्यास खाली पेट या भोजन करने के कुछ घंटे बाद करना बेहतर माना जाता है. जिन लोगों को कान या साइनस से जुड़ी गंभीर समस्या है, उन्हें इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए. गर्भवती महिलाओं और हृदय रोग से जूझ रहे लोगों को भ्रामरी प्राणायाम शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए. अभ्यास के दौरान गुनगुनाहट की आवाज को जबरदस्ती तेज करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. आवाज सहज और आरामदायक होनी चाहिए. अगर अभ्यास करते समय चक्कर, बेचैनी या किसी तरह की असुविधा महसूस हो, तो तुरंत अभ्यास रोक देना चाहिए.

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