Kapalbhati: सर्दी-जुकाम से लेकर डायबिटीज तक, कपालभाति के 3 प्रकार और उनके फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Kapalbhati Ke 3 Prakar: योग को शरीर और मन को स्वस्थ रखने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है. इसमें कई ऐसी क्रियाएं शामिल हैं, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करती हैं. इन्हीं में से एक है कपालभाति. इसे योग की शुद्धिकरण क्रियाओं में शामिल किया गया है. कपालभाति का अभ्यास मुख्य रूप से श्वसन तंत्र और कपाल क्षेत्र की सफाई से जुड़ा माना जाता है.

हालांकि, कपालभाति केवल एक प्रकार की नहीं होती, बल्कि इसके तीन प्रमुख रूप बताए गए हैं. आयुष मंत्रालय के अनुसार, कपालभाति के तीन प्रकार हैं- वातक्रम कपालभाति, व्युत्क्रम कपालभाति और शीतक्रम कपालभाति. इन तीनों की अभ्यास विधि अलग-अलग है. आइए जानते हैं इनके बारे में और इनसे जुड़े पारंपरिक लाभ क्या हैं… 

1. वातक्रम कपालभाति

वातक्रम कपालभाति इसका सबसे प्रचलित रूप है. इसमें नाक से सांस को तेजी से बाहर छोड़ा जाता है, जबकि सांस अंदर लेने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सहज और स्वाभाविक रहती है. इस दौरान पेट की मांसपेशियों और नाभि क्षेत्र को सक्रिय किया जाता है. योग परंपरा में इसके अभ्यास को श्वसन तंत्र की सफाई और फेफड़ों की कार्यक्षमता से जोड़कर देखा जाता है. इसके नियमित और सही अभ्यास से श्वास लेने की प्रक्रिया पर नियंत्रण, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता विकसित करने में मदद मिल सकती है. पारंपरिक योग मान्यताओं में इसे पाचन क्रिया को सक्रिय करने और शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ाने वाली क्रिया भी माना गया है.

2. व्युत्क्रम कपालभाति

व्युत्क्रम कपालभाति जल आधारित शुद्धिकरण क्रिया है. इसमें गुनगुने नमक मिले पानी को नाक के रास्ते अंदर खींचकर मुंह से बाहर निकाला जाता है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य नासिका मार्ग की सफाई करना है. योग अभ्यास में इसे नाक और साइनस क्षेत्र की सफाई से जुड़ी क्रिया माना जाता है. इससे नाक में जमा अतिरिक्त बलगम और गंदगी बाहर निकालने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इस क्रिया को सही तकनीक से करना जरूरी है. पानी की मात्रा, तापमान और नमक का अनुपात गलत होने पर परेशानी हो सकती है.

3. शीतक्रम कपालभाति

शीतक्रम कपालभाति की प्रक्रिया व्युत्क्रम कपालभाति से अलग होती है. इसमें गुनगुना नमक मिला पानी मुंह में लेकर नाक के रास्ते बाहर निकाला जाता है. यह भी नासिका मार्ग की सफाई से जुड़ी योगिक शुद्धिकरण क्रिया है. पारंपरिक योग मान्यताओं के अनुसार, इसका अभ्यास नाक और ऊपरी श्वसन मार्ग में जमा कफ को बाहर निकालने में सहायक माना जाता है. हालांकि, इसे बिना सही प्रशिक्षण के करने से बचना चाहिए.

कपालभाति के अभ्यास से जुड़े पारंपरिक लाभ

आयुष मंत्रालय के योग संबंधी विवरण में कपालभाति को कपाल और ऊपरी श्वसन तंत्र के शुद्धीकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण क्रिया बताया गया है. योग परंपरा में इसके अभ्यास को कफ दोष कम करने, श्वसन प्रक्रिया को बेहतर बनाने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने से जोड़ा जाता है. वातक्रम कपालभाति में पेट की मांसपेशियों का सक्रिय संकुचन होता है, जबकि व्युत्क्रम और शीतक्रम कपालभाति में जल के माध्यम से नासिका मार्ग की सफाई की जाती है. इन क्रियाओं का अभ्यास व्यक्ति की क्षमता और सही विधि के अनुसार ही करना चाहिए.

कपालभाति करते समय इन बातों का रखें ध्यान

कपालभाति हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती. तेज गति से सांस छोड़ने वाली क्रिया का अभ्यास गलत तरीके से करने पर चक्कर, बेचैनी या अन्य परेशानी हो सकती है. उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, पेट की सर्जरी, गर्भावस्था या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में इसे करने से पहले डॉक्टर और प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. व्युत्क्रम और शीतक्रम कपालभाति जैसी जल आधारित क्रियाएं भी प्रशिक्षित व्यक्ति के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए. नाक में संक्रमण, चोट या अन्य समस्या होने पर इन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के न करें. कपालभाति को मधुमेह, मोटापा, अस्थमा या साइनस जैसी बीमारियों का इलाज नहीं मानना चाहिए. यह योग अभ्यास का हिस्सा है, चिकित्सा का विकल्प नहीं.

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