Oral Cancer Symptoms: मुंह में छाले पड़ना या सर्दी-जुकाम के दौरान आवाज का बदल जाना आम समस्या मानी जाती है. अधिकांश मामलों में ये परेशानियां कुछ दिनों के भीतर अपने आप ठीक भी हो जाती हैं. लेकिन यदि मुंह में बार-बार छाले पड़ रहे हों, वे लंबे समय तक ठीक न हो रहे हों या आवाज में लगातार बदलाव बना रहे, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा करना खतरनाक साबित हो सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षण कई बार ओरल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की ओर भी संकेत कर सकते हैं.
शुरुआती लक्षणों को पहचानना है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह में लगातार छाले पड़ना और उनका जल्दी ठीक न होना, आवाज में बदलाव, मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना, मसूड़ों या गाल में सूजन जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए. यदि ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है. कई मामलों में यही शुरुआती संकेत ओरल कैंसर की पहचान का आधार बनते हैं.
तंबाकू और शराब बढ़ाते हैं खतरा
ओरल कैंसर के प्रमुख कारणों में तंबाकू, पान मसाला और शराब का सेवन शामिल है. इनका नियमित और लंबे समय तक सेवन करने से कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. इसके अलावा खराब ओरल हाइजीन, दांतों की सफाई में लापरवाही और मसूड़ों या दांतों से जुड़ी समस्याओं का समय पर इलाज न कराना भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाता है.
इन संकेतों पर तुरंत हो जाएं सतर्क
अगर मुंह के छाले दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें और दर्द लगातार बढ़ता जाए, तो यह चिंता का विषय हो सकता है. इसके अलावा मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना, घाव का धीरे-धीरे बढ़ना, चबाने या निगलने में परेशानी होना, दांतों का ढीला पड़ना, बिना किसी कारण वजन कम होना और लगातार कमजोरी महसूस होना भी गंभीर संकेत माने जाते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
आवाज में बदलाव को न समझें सामान्य
विशेषज्ञों के अनुसार यदि बिना सर्दी-जुकाम के भी आवाज लंबे समय तक बैठी रहे या भारी महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए. यह गले या मुंह के अंदर विकसित हो रही किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. कई बार यह स्थिति ओरल कैंसर से भी जुड़ी हो सकती है.
समय पर जांच से बच सकती है जान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ओरल कैंसर की शुरुआती चरण में पहचान हो जाए तो इसका इलाज काफी हद तक सफल हो सकता है. समय पर जांच और सही उपचार से मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना बढ़ जाती है. बीमारी की पुष्टि के लिए डॉक्टर मुंह की विस्तृत जांच, बायोप्सी और अन्य आवश्यक टेस्ट कराते हैं. जितनी जल्दी बीमारी का पता चलता है, इलाज उतना ही आसान और प्रभावी होता है.
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ओरल कैंसर से बचाव के लिए तंबाकू और शराब से दूरी बनाना, नियमित रूप से दांतों की सफाई करना और मुंह से जुड़ी किसी भी असामान्य समस्या को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है. छोटी दिखने वाली समस्याएं यदि लंबे समय तक बनी रहें तो वे गंभीर रूप ले सकती हैं. इसलिए समय रहते सतर्क रहना और चिकित्सकीय सलाह लेना ही सबसे बेहतर उपाय है.
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