Garudasana Benefits: स्वस्थ शरीर और बेहतर जीवनशैली के लिए नियमित योग और संतुलित आहार बेहद जरूरी माना जाता है. योग में कई ऐसे आसन हैं, जो शरीर को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करते हैं. इन्हीं में से एक है गरुड़ासन, जिसे बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए लाभकारी योगासन माना जाता है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह योगासन शरीर का संतुलन बेहतर बनाने, एकाग्रता बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है. हालांकि, इस आसन का अभ्यास सही तरीके से करना और जरूरी सावधानियों का पालन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
क्या है गरुड़ासन?
गरुड़ासन का नाम ‘गरुड़’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ चील होता है. इस योगासन के दौरान शरीर की मुद्रा चील की तरह दिखाई देती है, इसलिए इसे गरुड़ासन कहा जाता है. अंग्रेजी में इसे ईगल पोज (Eagle Pose) के नाम से भी जाना जाता है.
आयुष मंत्रालय ने बताए गरुड़ासन के फायदे
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गरुड़ासन संतुलन, एकाग्रता और शारीरिक मजबूती बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण योगासन है. इसके नियमित अभ्यास से हाथों और पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. साथ ही यह टखनों, पिंडलियों, जांघों और कंधों की मांसपेशियों को भी मजबूती प्रदान करता है.
इसके अलावा यह पैरों और कूल्हों की जकड़न कम करने, शरीर का संतुलन बेहतर बनाने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है. नियमित अभ्यास से कंधों और ऊपरी पीठ की अकड़न भी कम हो सकती है. मंत्रालय के मुताबिक, यह योगासन नसों को सक्रिय कर नर्वस सिस्टम के बेहतर काम करने में भी सहायक माना जाता है.
गरुड़ासन करने का सही तरीका
गरुड़ासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं और सामान्य रूप से सांस लेते रहें. इसके बाद घुटनों को हल्का मोड़ें और दोनों हाथों को सामने की ओर ले आएं. अब शरीर का पूरा संतुलन दाएं पैर पर रखें और बाएं पैर को उठाकर दाईं टांग के आगे से घुमाते हुए पीछे की ओर ले जाएं. इस दौरान बाईं जांघ दाईं जांघ के ऊपर रहेगी.
इसके बाद दोनों बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए क्रॉस करें. इस दौरान बाईं बाजू को दाईं बाजू के ऊपर रखें और दोनों हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में लाने का प्रयास करें. जितनी देर संभव हो इस स्थिति में बने रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं. इस तरह गरुड़ासन के तीन से पांच चक्र किए जा सकते हैं.
इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी
गरुड़ासन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए थोड़ा कठिन हो सकता है, इसलिए शुरुआत में इसे धीरे-धीरे और सही तकनीक के साथ करना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति के घुटने, टखने या कंधे में हाल ही में चोट लगी हो, तो उसे इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में योग शुरू करने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है.
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