Paschimottanasana Benefits: पेट की चर्बी और कब्ज से हैं परेशान? रोज करें पश्चिमोत्तानासन, जानिए सही तरीका और फायदे

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Paschimottanasana Benefits: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों तक कुर्सी पर बैठकर काम करना आम बात हो गई है. लगातार बैठे रहने की वजह से पाचन तंत्र धीमा पड़ने लगता है, पेट की चर्बी बढ़ने लगती है और कब्ज जैसी समस्याएं भी परेशान करने लगती हैं. ऐसे में योग विशेषज्ञ पश्चिमोत्तानासन को सबसे आसान और प्रभावी योगासनों में से एक मानते हैं. यह न सिर्फ पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है, बल्कि शरीर को लचीला बनाने और दिनभर की थकान दूर करने में भी सहायक माना जाता है.

क्या है पश्चिमोत्तानासन?

पश्चिमोत्तानासन दो शब्दों से मिलकर बना है. इसमें ‘पश्चिम’ का अर्थ शरीर का पिछला हिस्सा और ‘उत्तान’ का अर्थ खिंचाव होता है. इस आसन में शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी से लेकर पैरों तक अच्छा खिंचाव महसूस होता है. इस दौरान पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ता है, जो पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है.

आयुष मंत्रालय ने बताए इसके फायदे

आयुष मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, पश्चिमोत्तानासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसके नियमित अभ्यास से साइटिका की संभावना कम हो सकती है. इसके अलावा यह कब्ज, मोटापा, अपच और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. मंत्रालय के मुताबिक, रोजाना कुछ समय तक इस आसन का अभ्यास करने से शरीर अधिक लचीला बनता है, पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है और मानसिक तनाव कम करने में भी मदद मिल सकती है.

क्यों कहा जाता है इसे सेहत के लिए खास?

योग शास्त्रों में पश्चिमोत्तानासन को बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए महत्वपूर्ण योगासन माना गया है. इस आसन के दौरान शरीर आगे की ओर झुकता है, जिससे रीढ़ की हड्डी, कमर और पैरों की मांसपेशियों में अच्छा खिंचाव आता है. साथ ही शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे शरीर अधिक सक्रिय महसूस करता है. नियमित अभ्यास से मोटापा नियंत्रित रखने और मन को शांत रखने में भी मदद मिल सकती है.

पश्चिमोत्तानासन करने का सही तरीका

इस आसन का अभ्यास करने से पहले सही तकनीक जानना जरूरी है. शुरुआत में शरीर पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए. सबसे पहले जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैला लें. इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर झुकाएं. अब दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़ने की कोशिश करें और सिर को घुटनों के करीब लाने का प्रयास करें. कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में रहें. इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं.

किन लोगों को नहीं करना चाहिए यह आसन?

आयुष मंत्रालय ने अपने पोस्ट में बताया है कि जिन लोगों के पेट में अल्सर की समस्या है, उन्हें पश्चिमोत्तानासन करने से बचना चाहिए. इसके अलावा किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को यह योगासन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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