Shalabhasana Benefits: लंबे समय तक बैठने से कमर-पিঠ में परेशानी? शलभासन से मजबूत हो सकती हैं मांसपेशियां

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Shalabhasana Benefits: आजकल घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल देखते समय लगातार झुककर रहना और रोजमर्रा की जिंदगी में शारीरिक गतिविधि कम होना आम हो गया है. इसका असर शरीर की मांसपेशियों, खासकर पीठ और कमर पर भी पड़ सकता है. ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाना शरीर को सक्रिय रखने का एक तरीका हो सकता है.

शोध के मुताबिक योग से लंबे समय से बनी लोअर बैक पेन की समस्या में कुछ लोगों को सीमित लाभ मिल सकता है, हालांकि इसका असर व्यक्ति और अभ्यास के तरीके पर निर्भर करता है. योग के कई आसनों में शलभासन (Locust Pose) को पीठ और शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर काम करने वाला आसन माना जाता है. इसे करते समय पेट के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है, जिससे पीठ, जांघों और हिप्स की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं.

पीठ और कमर की मांसपेशियों पर पड़ता है असर

शलभासन देखने में आसान लग सकता है, लेकिन इसे करते समय शरीर के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं. पेट के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करने से पीठ और कमर के आसपास की मांसपेशियों पर काम होता है. नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर यह आसन शरीर की बैक मसल्स को मजबूत बनाने वाली योग दिनचर्या का हिस्सा हो सकता है. हालांकि, किसी भी आसन को करते समय शरीर की क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करना जरूरी है.

जांघों और हिप्स के लिए भी उपयोगी हो सकता है अभ्यास

शलभासन में पैरों को ऊपर उठाने की वजह से जांघों और हिप्स की मांसपेशियां भी सक्रिय होती हैं. नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ इसे शामिल करने से शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है. खासकर उन लोगों के लिए योग उपयोगी हो सकता है जिनकी दिनचर्या में लंबे समय तक बैठना और कम शारीरिक गतिविधि शामिल है. हालांकि, केवल एक आसन को पूरी तरह से कमर की समस्या का समाधान नहीं माना जाना चाहिए.

लोअर बैक पेन में योग कितना मददगार?

योग को लेकर उपलब्ध शोध में लंबे समय से रहने वाले लोअर बैक पेन में कुछ लाभ देखने को मिले हैं, लेकिन ये लाभ आमतौर पर छोटे होते हैं और योग को अन्य व्यायामों से स्पष्ट रूप से बेहतर साबित नहीं किया गया है. इसलिए अगर किसी व्यक्ति को हल्का कमर दर्द है, तो विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार योग और अन्य उपयुक्त एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. वहीं तेज दर्द, चोट या लगातार बनी रहने वाली समस्या में खुद से कोई आसन शुरू करने के बजाय डॉक्टर या योग्य फिजिकल थेरेपिस्ट की सलाह लेना बेहतर है.

सांस लेने पर भी देना होता है ध्यान

शलभासन में पेट के बल लेटकर शरीर के कुछ हिस्सों को ऊपर उठाया जाता है. इस दौरान सांस को रोकने के बजाय सहज और सामान्य तरीके से सांस लेना जरूरी है. योग में शारीरिक मुद्रा के साथ सांस लेने की सही तकनीक पर भी ध्यान दिया जाता है. नियमित योग अभ्यास समग्र स्वास्थ्य और शारीरिक सक्रियता को सपोर्ट कर सकता है, लेकिन किसी विशेष बीमारी के इलाज के तौर पर इसे इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

वेट मैनेजमेंट में भी योग की भूमिका

योग को शारीरिक गतिविधि के तौर पर दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. शोध में योग से वजन प्रबंधन में कुछ संभावित लाभ भी देखे गए हैं, लेकिन बेहतर परिणाम के लिए इसे संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ जोड़ना जरूरी है. इसलिए अगर आपकी दिनचर्या में ज्यादातर समय बैठकर काम करना शामिल है, तो रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि के साथ योग को शामिल करना शरीर को एक्टिव रखने का एक विकल्प हो सकता है.

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

योग आमतौर पर स्वस्थ लोगों के लिए उचित तरीके और प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर की निगरानी में सुरक्षित माना जाता है, लेकिन गलत तरीके से करने पर चोट या मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है. पहले से चोट, रीढ़ की समस्या या कोई अन्य स्वास्थ्य स्थिति होने पर कुछ योगासन बदलने या उनसे बचने की जरूरत पड़ सकती है. खासकर अगर आपको गंभीर कमर दर्द, चोट या साइटिका जैसी समस्या है, तो शलभासन को खुद से शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.

यह भी पढ़े: कमर-गर्दन के दर्द और पेट की चर्बी से परेशान हैं? रोज करें ये योगासन, शरीर में आएगा लचीलापन

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