Stress Management Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) लोगों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन गया है. पढ़ाई, करियर, नौकरी, आर्थिक जिम्मेदारियां और पारिवारिक दबाव के बीच बड़ी संख्या में लोग लगातार मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं. स्थिति यह है कि कई युवाओं ने तनाव को अपनी दिनचर्या का हिस्सा मान लिया है. वहीं, घंटों तक मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर समय बिताना भी इस समस्या को और बढ़ा रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार तनाव का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है. लंबे समय तक तनाव में रहने से नींद, पाचन, ऊर्जा स्तर, त्वचा और हार्मोनल संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने हाल ही में कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताया है जिन्हें लोग हेल्दी समझकर अपनाते हैं, लेकिन वास्तव में ये आदतें शरीर के लिए तनाव से निपटना और मुश्किल बना सकती हैं.
कोर्टिसोल बढ़ने से बढ़ सकती हैं समस्याएं
तनाव का सीधा संबंध कोर्टिसोल हार्मोन से माना जाता है. कोर्टिसोल को आमतौर पर “स्ट्रेस हार्मोन” कहा जाता है. जब इसका स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है तो शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं. रुजुता दिवेकर के अनुसार, कुछ खान-पान संबंधी आदतें शरीर की प्राकृतिक तनाव प्रबंधन क्षमता को कमजोर कर सकती हैं. ऐसे में संतुलित आहार और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है.
ये 3 आदतें बढ़ा सकती है तनाव
1. गलत तरीके से लो-कार्ब डाइट अपनाना
इन दिनों लो-कार्ब डाइट का चलन तेजी से बढ़ा है. हालांकि, कई लोग इसे अपनाते समय अपनी डाइट से जरूरी पारंपरिक खाद्य पदार्थों को भी हटाने लगते हैं. रोटी, दाल, चावल, पोहा, उपमा, इडली और डोसा जैसे पारंपरिक भोजन को छोड़कर लोग अक्सर केवल कार्बोहाइड्रेट कम करने पर ध्यान देते हैं. जबकि असली जरूरत अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जैसे बिस्कुट, चॉकलेट और पैकेटबंद स्नैक्स को सीमित करने की होती है. दिवेकर के मुताबिक, जब संतुलित आहार में कमी आती है तो GABA नामक न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर भी प्रभावित हो सकता है. यह न्यूरोट्रांसमीटर तनाव को कम करने में मदद करता है. ऐसे में असंतुलित डाइट तनाव से निपटने की शरीर की क्षमता को कमजोर कर सकती है.
2. सुबह का नाश्ता छोड़ना
कई लोग सुबह समय की कमी या व्यस्त दिनचर्या के कारण केवल चाय या कॉफी पीकर घर से निकल जाते हैं. उन्हें लगता है कि बाद में खाना खा लेने से काम चल जाएगा, लेकिन यह आदत तनाव बढ़ाने का कारण बन सकती है. शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक के अनुसार सुबह के समय कोर्टिसोल का स्तर स्वाभाविक रूप से बढ़ता है. यदि इस समय शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता तो यह चक्र प्रभावित हो सकता है और तनाव का स्तर लंबे समय तक ऊंचा बना रह सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि दिन की शुरुआत हेल्दी नाश्ते से करनी चाहिए, ताकि शरीर को जरूरी ऊर्जा और पोषण मिल सके.
3. मौसमी फलों से दूरी बनाना
फिटनेस और डाइटिंग के नाम पर कई लोग फलों का सेवन कम कर देते हैं. खासतौर पर कुछ लोग फलों में मौजूद प्राकृतिक शुगर को लेकर चिंतित रहते हैं और केले, आम जैसे मौसमी फलों से दूरी बना लेते हैं. रुजुता दिवेकर के अनुसार यह आदत भी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. मौसमी फल प्रीबायोटिक्स का अच्छा स्रोत होते हैं, जो आंतों के स्वास्थ्य और बेहतर पाचन में मदद करते हैं. इसके अलावा इनमें एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो त्वचा और बालों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं. लंबे समय तक तनाव की स्थिति में इन पोषक तत्वों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
तनाव कम करने के लिए संतुलित खान-पान जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्टिसोल को नियंत्रित करने और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने का मतलब भूखे रहना या अत्यधिक डाइटिंग करना नहीं है. इसके बजाय संतुलित और पौष्टिक भोजन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है. सही खान-पान, नियमित नाश्ता और मौसमी फलों का सेवन न केवल शरीर को पोषण देता है, बल्कि तनाव से लड़ने की क्षमता को भी मजबूत बनाने में मदद करता है.
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