Supt Virasana: योग में कई ऐसे आसन हैं, जो शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ मानसिक तनाव कम करने और शरीर को आराम देने में भी मदद करते हैं. सुप्त वीरासन भी ऐसा ही एक योगासन है, जिसे शरीर के लिए गहरे खिंचाव और विश्राम वाला अभ्यास माना जाता है. नियमित अभ्यास से रीढ़ और कूल्हों के लचीलेपन को बेहतर करने के साथ जांघों की मांसपेशियों में भी खिंचाव आता है.
सुप्त वीरासन का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है. ‘सुप्त’ का मतलब लेटा हुआ या सोया हुआ और ‘वीरासन’ का अर्थ वीर या योद्धा की मुद्रा में बैठना होता है. इस आसन में पहले वीरासन की स्थिति बनाई जाती है और फिर शरीर को पीछे की ओर लेटाया जाता है. इससे शरीर के सामने वाले हिस्से, जांघों और पेट की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है और शरीर को आराम मिलता है.
सुप्त वीरासन कैसे करें?
सबसे पहले योग मैट पर घुटनों के बल बैठें और दोनों पैरों को पीछे की ओर रखें. अब एड़ियों के बीच बैठते हुए वीरासन की मुद्रा में आ जाएं. इसके बाद दोनों हाथों का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे शरीर को पीछे की ओर झुकाएं. जब आपको स्थिति सहज लगे, तो पीठ को धीरे-धीरे जमीन की ओर ले जाएं और सिर को भी आराम से टिकाएं. दोनों हाथों को शरीर के पास ढीला छोड़ दें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें.
इस दौरान जांघों, पेट और शरीर के सामने वाले हिस्से में खिंचाव महसूस हो सकता है. अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय तक इसी स्थिति में रहें. इसके बाद हाथों का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे वापस बैठने की स्थिति में आएं. पहली बार अभ्यास करने वालों को जल्दबाजी करने के बजाय किसी योग्य योग प्रशिक्षक की देखरेख में इसे सीखना चाहिए.
रीढ़ और कूल्हों के लिए माना जाता है फायदेमंद
सुप्त वीरासन में शरीर पीछे की ओर खुलता है, जिससे रीढ़ और कूल्हों के आसपास के हिस्से में खिंचाव आता है. नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर शरीर के लचीलेपन को बेहतर करने में मदद मिल सकती है. यह आसन खासतौर पर जांघों की मांसपेशियों को अच्छा खिंचाव देता है. लंबे समय तक खड़े रहने, पैदल चलने या साइकिल चलाने के बाद पैरों में महसूस होने वाली थकान को कम करने के लिए भी इसे उपयोगी माना जाता है.
पाचन तंत्र के लिए भी बताया जाता है उपयोगी
सुप्त वीरासन में पेट के सामने वाले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव आता है. योग परंपरा में इसे पाचन क्रिया के लिए लाभकारी माना जाता है. नियमित अभ्यास को कब्ज जैसी समस्या में राहत देने वाले योग अभ्यासों में भी शामिल किया जाता है. इस आसन को भोजन के करीब 15 से 20 मिनट बाद करने की बात भी कही जाती है. हालांकि, भोजन के तुरंत बाद पीछे की ओर लेटना हर व्यक्ति के लिए आरामदायक नहीं होता. इसलिए इसे अपनी सुविधा और शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए.
गहरी सांस लेने और मन को शांत करने में मदद
पीछे की ओर झुकने के कारण इस आसन में छाती का हिस्सा खुलता है, जिससे गहरी सांस लेने में आसानी महसूस हो सकती है. योग की कुछ परंपराओं में इसे अनाहत चक्र से भी जोड़ा जाता है. नियमित योग अभ्यास तनाव कम करने और मन को शांत रखने में सहायक हो सकता है. सुप्त वीरासन को भी शरीर और मन को आराम देने वाले पुनर्स्थापनात्मक अभ्यास के तौर पर किया जाता है. हालांकि, इसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या का इलाज नहीं माना जाना चाहिए.
आयुष मंत्रालय से भी जुड़ा है इसका उल्लेख
सुप्त वीरासन को महत्वपूर्ण योगासन के रूप में बताया गया है. सामान्य बोलचाल और कुछ क्षेत्रीय ग्रंथों में इसे सुप्त वज्रासन से मिलता-जुलता या उसका एक रूप भी माना जाता है. अलग-अलग योग परंपराओं में इसके अभ्यास की स्थिति और तरीका कुछ अलग हो सकता है.
किन लोगों को नहीं करना चाहिए सुप्त वीरासन?
अगर किसी व्यक्ति को घुटनों, टखनों या कमर के निचले हिस्से में गंभीर दर्द या चोट है, तो उसे इस आसन का अभ्यास करने से बचना चाहिए. सुप्त वीरासन में घुटनों और टखनों पर दबाव पड़ सकता है, इसलिए दर्द होने पर इसे जबरदस्ती करने से समस्या बढ़ सकती है. गर्भवती महिलाओं को भी इस आसन का अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए. आसन करते समय दर्द, तेज खिंचाव या असहजता महसूस हो तो तुरंत मुद्रा से बाहर आ जाना चाहिए.
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