Bangladesh News: बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के नतीजे घोषित होने के बावजूद देश में हिंसा और तनाव कम नहीं हो रहा है. खासतौर पर अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों की हिरासत में मौत के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. ताजा मामले में गाइबांधा जिला जेल में बंद अवामी लीग के वरिष्ठ नेता शमीकुल इस्लाम की कस्टडी के दौरान मौत हो गई. 60 वर्षीय शमीकुल इस्लाम पलाशबाड़ी उपजिला में अवामी लीग के अध्यक्ष थे. बताया जा रहा है कि अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रंगपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.
जेल प्रशासन ने दी मौत की जानकारी
घटना की पुष्टि करते हुए गैबांधा जिला जेल के प्रमुख मोहम्मद अतीकुर रहमान ने बताया कि पहले उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए रंगपुर रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया. जेल सूत्रों के हवाले से बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने बताया कि 5 अगस्त 2024 को अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने के बाद शमीकुल के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए थे. उन्हें उसी साल 8 दिसंबर को ढाका में गिरफ्तार किया गया था और वे लंबे समय तक जेल में रहे.
जमानत के बाद भी दोबारा गिरफ्तारी
रिपोर्ट के अनुसार जमानत मिलने के बावजूद उन्हें एक अन्य मामले में फिर गिरफ्तार कर लिया गया और दोबारा जेल भेज दिया गया. इस घटना के बाद बांग्लादेश की जेलों में अवामी लीग नेताओं और समर्थकों की हिरासत में हो रही मौतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है. साथ ही मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर राजनीतिक दमन और लक्षित कार्रवाई के आरोप भी तेज हो गए हैं.
पूर्व मंत्री की मौत से बढ़ा विवाद
इससे पहले 7 फरवरी को अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन की भी दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी. वे पूर्व जल संसाधन मंत्री थे और ठाकुरगांव-1 सीट से सांसद भी रह चुके थे. बाद में उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
अवामी लीग ने लगाए गंभीर आरोप
अवामी लीग ने कहा कि जेल में सेन की मौत ने एक भयावह स्थिति उजागर कर दी है और आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए जेलों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पार्टी का कहना है कि अधिकारियों ने इसे प्राकृतिक मौत बताया, लेकिन सच्चाई अलग है. उनके अनुसार 83 वर्षीय पूर्व मंत्री को पर्याप्त मेडिकल सुविधा नहीं दी गई, जो गंभीर लापरवाही का मामला है.
“जेलों में इंसाफ नहीं, सिर्फ मौत”
पार्टी ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि रमेश चंद्र सेन की मौत कोई अकेली घटना नहीं बल्कि एक चेतावनी है. अवामी लीग के अनुसार जेलों के भीतर अब न्याय की उम्मीद नहीं रही और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है. पार्टी ने इसे साधारण मौत नहीं बल्कि सरकारी अपराध करार दिया.
यह भी पढ़े: अमेरिका से एयरक्राफ्ट खरीदेगा ईरान! शुरू हुई बातचीत; क्यों तेरहान ने लिया ये फैसला?