Crude Oil Price 153 Dollar: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग का आज 18वां दिन है. इस संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बना दिए हैं. लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के चलते क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है और इसका असर अब वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है.
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा है. तेल की कीमतें बढ़कर 153 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो हाल के वर्षों के उच्चतम स्तरों में से एक है. कीमतों में इस तेजी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मचा दी है.
होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई प्रभावित
जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित हो रही है. यह मार्ग दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है. ऐसे में यहां रुकावट आने से वैश्विक सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ा है.
दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका
तेल की कीमतों में तेजी का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है. परिवहन, बिजली और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो वैश्विक महंगाई में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.
लाखों लोग प्रभावित, संकट गहराया
इस युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं. लगातार बढ़ते संघर्ष ने मानवीय संकट को भी गहरा कर दिया है.
श्रीलंका ने लिया बड़ा फैसला
इस बीच भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने ईंधन बचाने के उद्देश्य से सरकारी दफ्तरों को सप्ताह में केवल 4 दिन खोलने का निर्णय लिया है.
ईंधन बचत से राहत की उम्मीद
श्रीलंकाई सरकार का मानना है कि इस फैसले से पेट्रोल और डीजल की खपत कम होगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद मिलेगी. गौरतलब है कि श्रीलंका पहले भी गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर चुका है.
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