क्यों नहीं हुआ भारत-अमेरिका व्यापार समझौता! US के वाणिज्य मंत्री ने बताई इसकी वजह,…इसलिए नही बनी बात?

Washington: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अभी तक नहीं हो पाया है. इस पर अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक का कहना है कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया. लुटनिक ने गुरूवार को ऑल-इन पॉडकास्ट में इसे बारे में विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि मैं आपको भारत के बारे में एक किस्सा सुनाता हूं. मैंने ब्रिटेन के साथ पहला समझौता किया और हमने ब्रिटेन से कहा कि उन्हें आने वाले दो शुक्रवार तक इसे पूरा करना होगा.

जो पहले आता है वह पहले पाता है

यानी ट्रेन अगले दो शुक्रवार के बाद स्टेशन से निकल जाएगी क्योंकि कई अन्य देशों के साथ भी समझौते हो रहे हैं. आप जानते हैं जो पहले आता है वह पहले पाता है. राष्ट्रपति ट्रंप समझौते चरणबद्ध तरीके से करते हैं. उन्होंने कहा कि जो (देश) पहले चरण (पहली सीढ़ी) पर सौदा करता है, उसे सबसे बेहतरीन शर्तें मिलती हैं. लुटनिक ने कहा कि ट्रंप इस तरह से काम करते हैं क्योंकि इस तरह से आपको बातचीत में आगे बढ़ने प्रेरणा मिलती है. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के साथ हुए समझौते के बाद हर किसी ने ट्रंप से पूछा कि अगला देश कौन सा होगा और राष्ट्रपति ने कई देशों के बारे में बात की लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई बार भारत का नाम लिया.

हमने भारत से कहा कि आपके पास तीन शुक्रवार हैं

लुटनिक ने कहा कि हम भारत से बात कर रहे थे और हमने भारत से कहा कि आपके पास तीन शुक्रवार हैं. उन्हें यह काम पूरा करना ही होगा. अमेरिका के वाणिज्य मंत्री ने कहा कि हालांकि वह देशों के साथ समझौतों पर बातचीत करेंगे और पूरा सौदा तय करेंगे लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह उनका (ट्रंप का) समझौता है. वही अंतिम निर्णय लेते हैं. वही समझौता करते हैं. इसलिए मैंने कहा कि आपको मोदी को शामिल करना होगा, सब कुछ तय है, आपको मोदी से राष्ट्रपति को फोन करवाना होगा. भारत को ऐसा करने में असहजता महसूस हुई, इसलिए मोदी ने फोन नहीं किया.

इंडोनेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के साथ व्यापार समझौतों की घोषणा

लुटनिक ने कहा कि उस शुक्रवार के बाद अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के साथ व्यापार समझौतों की घोषणा की. अमेरिका अन्य देशों के साथ बातचीत कर रहा था और यह मान रहा था कि भारत उनसे पहले बातचीत पूरी कर लेगा. उन्होंने कहा कि मैंने उनसे ऊंची दर पर बातचीत की थी. तो अब समस्या यह है कि समझौते ऊंची दरों पर हुए. फिर भारत ने फोन किया और कहा कि ठीक है, हम तैयार हैं. मैंने कहा कि तीन हफ्ते बाद किस बात के लिए तैयार हैं. मंत्री ने कहा कि मैंने उनसे पूछा क्या आप उस ट्रेन को पकड़ने के लिए तैयार हैं जो तीन हफ्ते पहले स्टेशन से निकल चुकी है.

कभी-कभी बदलते रहते हैं हालात

उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि हालात कभी-कभी बदलते रहते हैं. ऐसे उतार-चढ़ाव में कुछ देश गलत समय पर गलत कदम उठाते हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. लुटनिक ने कहा कि तो हुआ यह कि भारत उस समय गलत तरह से था और वे इसे (समझौते को) पूरा नहीं कर सके. उन्होंने कहा कि इसलिए ही बाकी सभी देश समझौते करते रहे और भारत इस दौड़ में सबसे पीछे रह गया. लुटनिक ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि मोदी जानते थे कि वह भारत के रूसी तेल खरीदने से नाखुश हैं और अमेरिका कभी भी भारत पर शुल्क बढ़ा सकता है.

अब तक छह दौर की हो चुकी है बातचीत

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह बयान दोनों देश के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान दिया. व्यापार समझौते पर अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है. इस समझौते में अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर लगने वाले 50 प्रतिशत शुल्क के समाधान के लिए एक ढांचागत समझौता शामिल है.

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