Israeli Parliament : इजरायल की संसद नेसेट में पीएम मोदी के संभावित भाषण को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है. बता दें कि इजरायल की विपक्षी पार्टियां बायकॉट की धमकी दे रही हैं, इसकी वजह से संसद में खाली सीटों की समस्या हो सकती है. ऐसे में हालात को देखते हुए इजरायल के संसद स्पीकर आमिर ओहाना ने एक अनोखी योजना बनाई है. उन्होंने पूर्व सांसदों को बुलाने का फैसला किया है, ताकि वे खाली जगहों पर बैठ सकें और PM मोदी के सामने इजरायल की कोई किरकिरी न हो. जानकारी के मुताबिक, PM मोदी 25 फरवरी 2026 को इजरायल के दौरे पर जा रहे हैं, जहां कई अहम समझौते भी होने की उम्मीद है.
PM मोदी के भाषण से दिक्कत
यह खबर ऐसे समय सामने आई है जब भारत और इजरायल के बीच रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में नए करार की चर्चा जोरों पर है. इसके साथ ही पीएम मोदी का इजरायल में जोरदार स्वागत किया जा रहा है. लेकिन घरेलू राजनीति ने इसमें रोड़ा अटका दिया है. इस मामले को लेकर विपक्ष का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यित्जाक एमित को आमंत्रित नहीं किया गया, तो वे भाषण का बहिष्कार करेंगे.
इजरायल की यह पुरानी परंपरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार इजरायल में यह एक पुरानी परंपरा है कि विदेशी नेताओं के संसद संबोधन के दौरान चीफ जस्टिस को बुलाया जाता है. लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने जस्टिस एमित की योग्यता पर सवाल उठाया और कहा कि उन्हें न्योता नहीं देने का फैसला किया है.
विपक्ष की मांग
ऐसे में विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इसके साथ ही कुछ ही दिनों पहले उन्होंने कहा था कि ‘अगर गठबंधन भारत के प्रधानमंत्री के साथ स्पेशल सेशन में सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट का बहिष्कार करता है, तो हम इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे.’ इस दौरान उन्होंने नेतन्याहू से अपील की, कि वे स्पीकर को जस्टिस एमित को न्योता देने का निर्देश दें. इस मामले को लेकर लैपिड का मानना है कि इससे नेसेट को शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी और इजरायल के विदेशी संबंधों पर असर पड़ेगा.
महत्वपूर्ण दोस्त और दुनिया की बड़ी शक्ति
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसके जवाब में संसद स्पीकर आमिर ओहाना ने विपक्ष की आलोचना को सिरे से खारिज कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर यायर लैपिड इजरायल के एक महत्वपूर्ण दोस्त और दुनिया की बड़ी शक्तियों में से एक के साथ संबंध खराब करना चाहते हैं, तो यह उनका अपना फैसला है.
पहले भी कई मौकों पर विदेशी नेताओं के संबोधन
ऐसे में एक बार फिर ओहाना ने याद दिलाया कि इसके पहले पहले भी कई मौकों पर विदेशी नेताओं के संबोधन हुए हैं, जैसे- अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे और यहां चीफ जस्टिस को नहीं बुलाया गया था. लेकिन इसके बाद भी विपक्ष ने उनका बहिष्कार नहीं किया. इसे लेकर स्पीकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि पूर्व सांसदों को बुलाकर संसद को भरा-भरा दिखाया जाएगा, ताकि PM मोदी के सामने कोई कमी न लगे.
PM मोदी के दौरे से इजरायल की बढ़ी उम्मीदें
बता दें कि PM मोदी का यह दौरा भारत-इजरायल संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच रक्षा सौदे, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा समझौते पर बातचीत हो सकती है. इतना ही नही बल्कि इजरायल पहले भी भारत को कई मौकों पर मदद कर चुका है, जैसे कारगिल युद्ध में हथियार सप्लाई. लेकिन इस बार घरेलू विवाद ने पूरे दौरे पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस मामले को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बायकॉट हुआ, तो यह इजरायल की आंतरिक राजनीति की कलह को दुनिया के सामने ला सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार विपक्ष की मांग को मानने को तैयार नहीं, क्योंकि जस्टिस एमित के चयन पर पहले से विवाद है. वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा बता रहा है. PM मोदी के दौरे से पहले यह विवाद सुलझ पाएगा या नहीं, यह देखना बाकी है.
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