Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जिसके सिर पर भगवान के बजाय अभिमान बैठा है, वह बहुत ही दुःखी होता है। सांसारिक कार्य करते समय हम भगवान को न भूल जाएँ- इस बात का हमेशा ख्याल रखें।व्यवसाय करते समय धर्म को भूल मत जाना।
ज्ञानी या विद्वान बनने से शान्ति प्राप्त नहीं होती। वह तो भक्ति में मग्न हो जाने पर ही मिलती है। जो सुख भोगता है। उसे दुःख भी भोगना पड़ा है। मन पर अंधविश्वास करने वाला अन्त में फंस जाता है। एक दिन मरना ही है- यह सभी जानते हैं, फिर भी मनुष्य पाप करता है, क्योंकि वह मृत्यु को भूल जाता है।
मन को मृत्यु का डर हमेशा बना रहे तो वह पाप के मार्ग पर नहीं जाएगा और अवश्य सुधर जाएगा। मृत्युदण्ड पाने के पहले कैदी को मिठाई दोगे तो वह उसे अच्छी नहीं लगेगी। उस समय तो उसे ईश्वर ही याद आएगा। मृत्यु के समय अतिशय वेदना होती है। हजार विच्छुओं के एक साथ काटने के जैसे वेदना प्रदान करने वाली मृत्यु को कैसे भूला जा सकता है!
और ऐसी मृत्यु का ध्यान हमेशा बना रहे तो मनुष्य के मन में पाप कर्म करने का विचार ही क्यों पैदा हो? मनुष्य यदि जन्म, मरण एवं वृद्धावस्था के दुःख को हमेशा याद रखे तो कभी पाप कर्म नहीं करेगा। यम के दूत यदि आज ही लेने आयें तो स्वर्ग प्राप्त होगा या नरक – इसका विचार करते हुए जीवित रहोगे तो पाप से बच जाओगे।
मृत्यु सिर पर बैठी है – ऐसा भान तुम्हें सतत सावधान रखेगा। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।