सूर्य के चौंकाने वाले तथ्य: अरबों साल पुराना तारा, फिर भी कई राज अनसुलझे

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Sun Facts: सर्दियों का असर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है. गर्मी का मौसम दस्तक देने लगा है. आने वाले समय में बढ़ता तापमान, लू की तपिश और चुभती धूप लोगों को परेशान कर सकती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सूर्य की गर्मी से हम इतने प्रभावित होते हैं, वह वास्तव में क्या है?

4.5 अरब साल पुराना रहस्यमय तारा

करीब 4.5 अरब वर्ष पुराना सूर्य एक रहस्यमय और विशाल खगोलीय पिंड है, जिसकी संरचना, तापमान और ऊर्जा आज भी वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बने हुए हैं. यह एक ‘पीला बौना’ तारा है, जो मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना अत्यंत गर्म और प्रकाशमान गोला है. सूर्य ही हमारे सौरमंडल का केंद्र है और पृथ्वी सहित सभी ग्रह उसी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में उसकी परिक्रमा करते हैं. पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी लगभग 93 मिलियन मील यानी 150 मिलियन किलोमीटर है. यह हमारे सौरमंडल का एकमात्र तारा है और यही पृथ्वी पर जीवन का आधार भी है. सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा के बिना न तो प्रकाश संभव है, न ही जीवन.

क्या कहता है NASA?

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, सूर्य को देखकर लगता है कि यह स्थिर है, लेकिन यह एक डायनैमिक तारा है जो लगातार बदलता रहता है और अंतरिक्ष में ऊर्जा भेजता रहता है. सूरज और सोलर सिस्टम पर उसके प्रभाव की स्टडी को हीलियोफिजिक्स कहते हैं. सूरज सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा पिंड है, इसका व्यास करीब 865,000 मील यानी 1.4 मिलियन किलोमीटर है, यानी पृथ्वी से 109 गुना बड़ा. अगर सूर्य खोखला होता तो उसमें 13 लाख पृथ्वी समा सकती थीं. इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति ग्रहों, क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं को ऑर्बिट में बांधे रखती है.

हालांकि पृथ्वी के लिए सूर्य अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन ब्रह्मांड के पैमाने पर यह एक सामान्य तारा माना जाता है. इससे कहीं बड़े—यहां तक कि सैकड़ों गुना विशाल—तारे भी खोजे जा चुके हैं, और कई तारकीय प्रणालियों में एक से अधिक तारे मौजूद होते हैं. सूर्य का अध्ययन वैज्ञानिकों को दूर स्थित अन्य तारों और आकाशगंगाओं को समझने में भी मदद करता है. सूर्य का सबसे भीतरी और सबसे गर्म भाग उसका कोर (केंद्र) है, जहां तापमान लगभग 27 मिलियन फारेनहाइट यानी 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है.

सतह से ज्यादा गर्म कोरोना

पृथ्वी से दिखाई देने वाली सूर्य की सतह को फोटोस्फीयर कहा जाता है, जिसका तापमान करीब 10,000 फारेनहाइट (लगभग 5,500 डिग्री सेल्सियस) होता है. यही वह परत है, जहां से सूर्य का अधिकांश प्रकाश अंतरिक्ष में फैलता है. हालांकि सूर्य का सबसे रहस्यमय हिस्सा उसकी बाहरी परत कोरोना है. आश्चर्य की बात यह है कि सतह से दूर जाने पर कोरोना का तापमान कम होने के बजाय बढ़ता जाता है और लगभग 3.5 मिलियन फारेनहाइट (करीब 2 मिलियन डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है. इस असामान्य ताप वृद्धि को “कोरोना हीटिंग” कहा जाता है, जिसका सटीक कारण आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना हुआ है.

गैलेक्सी में सूर्य की स्थिति और गति

सूर्य का त्रिज्या (रेडियस) लगभग 7 लाख किलोमीटर है, जबकि इसका सबसे निकटतम तारकीय पड़ोसी प्रॉक्सिमा सेंटॉरी लगभग 4.24 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है. हमारा सूर्य मिल्की वे गैलेक्सी की ओरियन स्पर भुजा (Orion Spur Arm) में स्थित है. यह करीब 4 लाख 50 हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार से गैलेक्सी के केंद्र की परिक्रमा करता है और एक चक्कर पूरा करने में लगभग 23 करोड़ वर्ष (230 मिलियन वर्ष) लगते हैं.

सूर्य का घूर्णन और झुकाव

अपनी धुरी पर सूर्य का घूर्णन भी अलग-अलग हिस्सों में भिन्न होता है. भूमध्य रेखा के पास यह लगभग 25 पृथ्वी दिनों में एक चक्कर पूरा करता है, जबकि ध्रुवीय क्षेत्रों में इसे करीब 36 दिन लगते हैं. सूर्य का घूर्णन अक्ष लगभग 7.25 डिग्री झुका हुआ है. चूंकि सूर्य ठोस पिंड नहीं, बल्कि गैसों और प्लाज़्मा का विशाल गोला है, इसलिए इसके विभिन्न भाग अलग-अलग गति से घूमते हैं — इसे वैज्ञानिक भाषा में “डिफरेंशियल रोटेशन” कहा जाता है.

11 साल का सोलर साइकिल और उसका असर

सूरज हर 11 साल में सोलर साइकिल से गुजरता है. सोलर एक्टिविटी से अंतरिक्ष का वातावरण प्रभावित होता है. इससे सैटेलाइट, जीपीएस और पावर ग्रिड तक प्रभावित हो सकते हैं. एनओएए स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर समय-समय पर अलर्ट जारी करता है. सूर्य पृथ्वी पर जीवन का आधार है — उसकी रोशनी से ही पृथ्वी गर्म रहती है और उसे ऊर्जा मिलती है.

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