माया की समस्त ग्रंथियों को खोल देता है ग्रंथ: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Puskar/Rajasthanपरम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीमद्भागवत महापुराण बड़ा अद्भुत ग्रंथ है। ग्रंथ का अर्थ होता है गांठ, पुलिंग में ग्रंथ कहते हैं और स्त्रीलिंग में ग्रंथि कहते हैं। ग्रंथि अर्थात् गांठ, ग्रंथ का मतलब गांठ और गांठ जो होती है वह बंधन में डालती है। लेकिन यह ग्रंथ ऐसा है, जो माया की समस्त ग्रंथियों को खोल देता है।
श्री शुकदेव जी कहते हैं राजन! मैं सात दिन कथा सुनाऊंगा। तुम्हारा मन, बुद्धि, चित्त, अन्तःकरण भगवान में लगा रहेगा। अंतिम समय जगे हुए, भगवान का स्मरण कर, कल्याण को प्राप्त कर लोगे। भगवान का विस्मरण ही मोह निद्रा में सो जाना है और परमात्मा का सुमिरण ही सावधान, सचेत और जागे रहना है।
अंतिम में भगवान का स्मरण हो जाये, क्या करना होगा? बार-बार भगवान का स्मरण करना होगा। जो हमारी आदत पड़ जाती है, तो आसान हो जाता है। वहीं अंतिम समय में होगा। इसलिए खूब भजन करो, भगवान का नाम लो, कीर्तन करो। कथा, कीर्तन, पूजा, स्मरण हमें सावधानी से भर देता है। अलार्म घड़ी में लगाते हैं, जब लगाते हैं, उस समय नहीं बजता।
जिस समय के लिए लगाते हैं उस समय बजता है। नवधा भक्ति- श्रवण, कीर्तन, स्मरण, तीर्थयात्रा, साधु सेवा करते रहो। घड़ी में अलार्म भर जायेगा, तब समय पर बजेगा। जब मृत्यु का समय आयेगा, जीवन में की गई साधना और सत्संग आपको जगा देगा। इस जीवन में मृत्यु के पहले जागना जरूरी है। जग, जागने की जगह है। यहां क्यों आये? जागने के लिए आये।
सोने के लिये मौत ही काफी है। जगत में आकर जाग जाय। जगायेगा कौन? अलार्म लगा देंगे, तब वह समय पर बजेगा, आपको जगा देगा, ये जो कथा सुन रहे हो, उसी समय के लिए अलार्म भरा जा रहा है और उस समय ये जगह देगा। भगवान का स्मरण करा देगा। मानव जीवन सफल हो जायेगा।
सभी हरि भक्तों को तीर्थगुरु पुष्कर आश्रम एवं साक्षात् गोलोकधाम गोवर्धन आश्रम के साधु-संतों की तरफ से शुभ मंगल कामना। श्रीदिव्य घनश्याम धाम
श्रीगोवर्धन धाम कॉलोनी बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) श्रीदिव्य मोरारी बापू धाम सेवाट्रस्ट, ग्रा.पो.-गनाहेड़ा पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).
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