विपत्ति से बचने का नहीं, उसे सहने का उपाय बताता है सत्संग – दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सुदामा चरित में भगवान श्रीकृष्ण ने मित्र का धर्म बताया। अपने बड़े से बड़े दुःख की परवाह न करके मित्र के छोटे से दुःख का निराकरण हो ऐसा प्रयास करना मित्र का धर्म है। सामने चिकनी चुपड़ी बातें करें और भीतर से बुरा चाहता हो उसे कुमित्र कहा गया है और ऐसे कुमित्र का त्याग करने में ही भलाई है।
भगवान् श्रीकृष्ण ने उद्धव जी को बुलाया और उन्हें कहा कि उद्धव, अब हम लीला समाप्त कर रहे हैं। पृथ्वी का भार उतर चुका है। धर्म की स्थापना हो चुकी है। हम जिस कार्य के लिये आये थे, वह पूर्ण हुआ, अब हम लीला समाप्त कर रहे हैं। उद्धव जी रो पड़े। उन्होंने कहा – प्रभु ! हमें साथ ले चलें,
“स्वधाम नय मामपि” हमने जीवन भर आपका जूंठा खाया, आपके उतारे कपड़े पहने, आपकी उतारी माला पहनी, सदा आपके साथ रहे, आप कह रहे हैं कि हम जा रहे हैं, इसका मतलब है कि हमें छोड़ रहे हो, हम आपके बिना रह नहीं सकेंगे। भगवान् ने अपने अनन्य प्रेमी एवं सेवक उद्धव जी से कहा कि तुम्हें यहां रहना पड़ेगा।
हर व्यक्ति प्रारब्ध की डोर से बंधा हुआ है। हम जो नहीं चाहते, वह जीवन में होता रहता है और जो चाहते हैं, वह नहीं हो पाता। क्योंकि व्यक्ति कर्म की डोर में, प्रारब्ध की डोर में बंधा हुआ है। उद्धव जी बोले – लेकिन मैं आपका वियोग कैसे सह सकूंगा? भगवान् ने कहा, विवेक से। यदि जीवन में विवेक हो तो दुःख बहुत आसानी से सहा जा सकता है।
अगर घर में ए.सी. है तो बड़े से बड़े शहर की गर्मी को भी आसानी से सह सकते हैं। यदि आप कार में यात्रा कर रहे हैं तो वर्षा से आपका बचाव हो सकता है। गर्म कपड़े और हीटर से सर्दी से बचाव हो सकता है। इसी तरह जीवन में आने वाली विपत्तियों से बचना हो, यदि विवेक का सहारा ले लिया जाये तो व्यक्ति बड़ी-से-बड़ी विपत्तियों से बच सकता है। विपत्ति हमारे पास न आये, इसके बजाय यदि विपत्ति सहने की हममें योग्यता आ जाय तो ज्यादा अच्छा है। विपत्ति न आये, ऐसा हम सोचेंगे तो यह सम्भव नहीं है क्योंकि यदि प्रारब्ध में लिखा है तो विपत्ति आयेगी ही।
हम विपत्ति से बचने का उपाय करते हैं। लेकिन विपत्ति का हम पर प्रभाव न हो, इसके लिये कोई उपाय नहीं करते। शास्त्र कहते हैं कि विपत्ति का हम पर प्रभाव न हो इसके लिए कोशिश करें। इसका उपाय क्या है? भगवान् श्रीकृष्ण उद्धव को बताते हैं कि- इसका उपाय है सत्संग। अगर जीवन में स्वाध्याय साधना और सत्संग है तो किसी भी परिस्थिति में हम शान्त रह सकते हैं। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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