Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जिस जीव पर प्रभु की कृपा उतरती है, उसे पाप की सजा शीघ्र ही मिलती है और जिस पर प्रभु की कृपा कम होती है, उसे पाप की सजा देर से मिलती है।
पाप करने वाला आज भले ही सुखी दिखाई देता हो, किन्तु कल उसे जब पाप का फल मिलेगा, तब वह दुःखी होगा। पापी यदि आज सुखी दिखाई देता है तो वह आज किये गये पाप के फलस्वरुप नहीं, बल्कि पूर्व संचित पुण्य के कारण सुखी होता है। जैसे ही उसके पुण्य समाप्त होंगे, वैसे ही उसे पाप का फल भोगना पड़ेगा और तब वह रो भी नहीं सकेगा।
अतः यदि पाप की सजा के रूप में दुःख दावानल उमड़ रहा हो तो समझना प्रभु की अपार कृपा आपके पापों को जला रही है और पाप करते हुए भी सुख की सरिता छलक रही हो तो समझना कि मेरे पुण्य की मूल पूँजी जल रही है और मैं असावधान बना हुआ हूँ। इसलिए पाप की सजा भोगने के लिए हमेशा तैयार रहोगे तो जीवन की सिद्धि प्राप्त हो सकेगी।
प्रत्येक इन्द्रिय से भक्ति करोगे तो पाप से बच सकोगे। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।