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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, ‘ प्रभाते करदर्शनम् ‘ के पीछे अपनी संस्कृति में कितनी भव्य भावना समाई है। भारतीय संस्कृति कहती है : हे मानव ! नित्य सवेरे ब्रह्ममुहूर्त में उठकर ध्यान चाहे परमात्मा का करो, किन्तु दर्शन तो अपने हाथ का ही करो।
और साथ ही साथ यह भावना भी करो कि – इन हाथों से दीन-दुखियों की वेदना के अश्रु पोछूँगा। इन हाथों से प्रभु का अर्चन-पूजन करूँगा। इन हाथों से खूब परिश्रम करके मेहनत की ही रोटी कमाऊँगा। इन हाथों से कोई दुराचार नहीं करूँगा। इन हाथों से किसी के अधिकारों को नहीं छीनूँगा।
इन हाथों से किसी के ऊपर कोई आघात नहीं करूँगा। इन हाथों से चोरी, जुआ या अन्य पापाचार नहीं करूँगा। इन हाथों से किसी को धक्का देकर गिराऊँगा नहीं। प्रभु ने यह हाथ सत्कर्म करने के लिए दिए हैं, अतः इनका उपयोग सत्कर्म में ही करूँगा और इनकी सहायता से भवसागर भी तर जाऊँगा।
जिसके जीवन में संयम नहीं और प्रभु भक्ति के लिए जिसके पास कोई नियम नहीं, उसका जीवन व्यर्थ है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
52वीं पुरुष एवं 44वीं महिला नेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 के पांचवें दिन महिला 69 और 76 किलो भार वर्ग में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया. स्पेशल ओलम्पिक में लगभग 44 दिव्यांग खिलाड़ियों ने भी विभिन्न श्रेणियों में हिस्सा लिया.