Inflation Alert: महंगाई पर नया अलर्ट! तेल के बढ़ते दामों से बढ़ सकती हैं लोन दरें, 5% के पार जाएगी मुद्रास्फीति; RBI सतर्क

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Inflation Alert: देश में लगातार बढ़ती महंगाई आम लोगों की चिंता का कारण बनती जा रही है. बीते कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे लोगों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता दिखाई दे रहा है. ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव धीरे-धीरे बाजार की कई दूसरी चीजों पर भी दिखाई देने लगता है. इसके अलावा हाल ही में सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद आर्थिक गतिविधियों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. इसी बीच कई अर्थशास्त्रियों ने आने वाले समय को लेकर चिंता जताई है, वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

पिछले 10 दिनों में लगातार बढ़े ईंधन के दाम

हाल ही में महज 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन बढ़ोतरी के बाद ईंधन की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ है. इससे आम लोगों के साथ-साथ परिवहन और व्यापार क्षेत्र पर भी असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है. इसके अलावा सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है. इसके बाद आर्थिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. अर्थशास्त्रियों ने भी इस विषय को लेकर चिंता जाहिर की है. अनुमान लगाया जा रहा है कि जून 2026 तक खुदरा महंगाई दर यानी CPI Inflation बढ़कर लगभग 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.

कैसे बढ़ सकती है महंगाई?

ईटाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अर्थशास्त्रियों ने इस विषय पर चिंता जाहिर की है. उनका मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता. बल्कि ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सामान ढुलाई की लागत भी बढ़ जाती है. जब परिवहन की लागत बढ़ती है तो उसका सीधा असर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर दिखाई देने लगता है. सब्जियां, खाद्य पदार्थ, घरेलू सामान और बिजली जैसी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं. ऐसे में आम उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.

RBI भी स्थिति पर रख रहा नजर

देश में बढ़ती महंगाई की आशंकाओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. बार्कलेज इंडिया की चीफ अर्थशास्त्री आस्था गुदवानी का कहना है कि जून में होने वाली मौनेटरी नीति कमेटी (MPC) की बैठक में RBI रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है. हालांकि, अगर महंगाई लगातार बढ़ती रही और यह 5 प्रतिशत से ऊपर जाने लगी तो वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है.

कच्चे तेल की कीमतें भी बनी चिंता

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौजूदा महंगाई मुख्य रूप से सप्लाई और ईंधन लागत से जुड़ी हुई है. ऐसे में सिर्फ रेपो रेट बढ़ाने से महंगाई पर तुरंत बड़ा असर नहीं पड़ेगा. RBI पहले यह समझना चाहता है कि ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का असर बाजार और उपभोक्ताओं पर कितना पड़ता है. वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. कई एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर लगभग 5 प्रतिशत कर दिया है. साथ ही आर्थिक विकास दर के अनुमान में भी कटौती की आशंका जताई जा रही है.

महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अब लोगों की नजर आने वाले समय में सरकार और RBI के फैसलों पर बनी हुई है, क्योंकि इन फैसलों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है.

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