SBI Research Report: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जून में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं. महंगाई, ब्याज दरों और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट ने कई अहम संकेत दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई फिलहाल रेपो रेट में बढ़ोतरी करने से बच सकता है और ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है. हालांकि, बढ़ती महंगाई, कमजोर होता रुपया और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने रह सकते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू मुद्रा पर दबाव को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई को ब्याज दर बढ़ाने के बजाय अल्पकालिक ब्याज दरों और अन्य नीतिगत उपायों का सहारा लेना चाहिए. ऐसे में जून की MPC बैठक में रेपो रेट को लेकर बड़ा फैसला देखने को मिल सकता है.
जून में स्थिर रह सकती हैं ब्याज दरें
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है, “हमारा अनुमान है कि ब्याज दरों को फिलहाल यथावत रखा जाएगा और आगे का फैसला आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा.” रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई को नियंत्रित करने और बाजार में तरलता प्रबंधन के लिए आरबीआई ऑपरेशन ट्विस्ट जैसे ब्याज दर आधारित उपकरणों का इस्तेमाल कर सकता है. इससे बिना रेपो रेट बढ़ाए बाजार की परिस्थितियों को संभालने में मदद मिल सकती है.
GDP ग्रोथ को लेकर सकारात्मक अनुमान
एसबीआई रिसर्च ने FY26-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान लगाया है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण भविष्य में इस अनुमान में बदलाव संभव है. रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि दर लगभग 7.2% रह सकती है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.5% की वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया है.
महंगाई पर बनी हुई है चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि वृद्धि और महंगाई के मौजूदा रुझानों को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अगले तीन तिमाहियों तक 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है. हालांकि मौजूदा तिमाही में महंगाई दर 4.0 से 4.1 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है. वहीं वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत रखा गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महंगाई को लेकर ऊपर की ओर जोखिम अभी भी बने हुए हैं.
रुपए की कमजोरी पर जताई चिंता
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में भारतीय रुपए की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत आर्थिक आधार होने के बावजूद रुपया अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अधिक कमजोर हो रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप बढ़ाने की जरूरत है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रुपए में एकतरफा गिरावट को रोकने और अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त है. इसके साथ ही भुगतान संतुलन (BOP) को मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति अपनाने की आवश्यकता भी बताई गई है.
कच्चे तेल की कीमतें बनी रहेंगी ऊंची
रिपोर्ट में पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है. एसबीआई रिसर्च के अनुसार, क्षेत्र में जारी शांति वार्ताओं को लेकर अभी भरोसे की स्थिति नहीं बनी है. ऐसे में जोखिम प्रीमियम लंबे समय तक ऊंचा बना रह सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक इसी वजह से वर्ष 2026 के अधिकांश समय में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं, जिससे भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है.
पेट्रोल-डीजल पर बढ़ सकता है दबाव
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में ईंधन कीमतों को लेकर भी बड़ा संकेत दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, यदि तेल विपणन कंपनियों के नुकसान की पूरी भरपाई करनी है तो पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती करनी होगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो मौजूदा स्तर से घरेलू ईंधन कीमतों में करीब 6 रुपये प्रति लीटर तक की और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है.
क्या है इसका आम लोगों पर असर?
एसबीआई की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब महंगाई, ईंधन कीमतें और ब्याज दरें आम लोगों के लिए सबसे बड़े आर्थिक मुद्दे बने हुए हैं. यदि आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं करता है तो होम लोन और अन्य कर्ज लेने वालों को राहत मिल सकती है. वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ईंधन दरों में संभावित बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है. आने वाले दिनों में आरबीआई की MPC बैठक और वैश्विक बाजार की स्थिति पर देश की अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी.