भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक हालात का असर साफ नजर आ रहा है. मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है. इसके साथ ही कमजोर होते रुपए और अन्य नकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया है. नतीजा यह रहा कि बाजार लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट के साथ बंद हुआ.
सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 852.49 अंक यानी 1.09 प्रतिशत गिरकर 77,664 पर बंद हुआ. वहीं एनएसई निफ्टी50 205.05 अंक यानी 0.84 प्रतिशत गिरकर 24,173.05 पर आ गया. दिन के दौरान भी बाजार में कमजोरी बनी रही. सेंसेक्स 77,983.66 पर खुला और गिरकर 77,574.18 के निचले स्तर तक पहुंच गया. निफ्टी भी 24,202.35 पर खुलने के बाद 24,134.80 तक फिसल गया. पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 1,600 अंक यानी 2 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि निफ्टी में भी करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में
केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.67 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ है कि बाजार में बिकवाली हर सेगमेंट में देखने को मिली.
सेक्टरवार हालात
लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए. निफ्टी फार्मा में 2.36 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया में 0.90 प्रतिशत की बढ़त को छोड़ दें, तो बाकी सभी सेक्टर दबाव में रहे. सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी ऑटो में 2.35 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 2.19 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.83 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.38 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 1.31 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.22 प्रतिशत रही.
किन शेयरों में तेजी और गिरावट
निफ्टी50 में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, अदाणी इंटरप्राइजेज, कोल इंडिया, अपोलो हॉस्पिटल, अदाणी पोर्ट्स, ओनजीसी और नेस्ले इंडिया के शेयरों में तेजी देखने को मिली. वहीं ट्रेंट, श्रीराम फाइनेंस, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, इंफोसिस, एसबीआई लाइफ, टीएमपीवी और एमएंडएम के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई.
गिरावट की बड़ी वजह
बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है. होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप होने से कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है.
कमजोर होता रुपया
इस बीच भारतीय रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ है और एक महीने में दूसरी बार 94 के स्तर को पार कर गया है. कमजोर रुपया भी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत देता है, क्योंकि इससे आयात महंगा होता है और कंपनियों की लागत बढ़ती है. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.1 प्रतिशत बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. यह लगातार चौथे दिन की बढ़त है. इस साल अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 70 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है, जिसमें बड़ा हिस्सा हालिया भू-राजनीतिक तनाव के कारण आया है.
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