AC Temperature Tips: भीषण गर्मी के बीच एयर कंडीशनर (AC) अब लोगों की जरूरत बन चुका है. तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही लोग घर, ऑफिस और दुकानों में AC का सहारा लेते हैं. हालांकि, कई लोगों की आदत होती है कि जैसे ही AC चालू करें, उसका तापमान सीधे 16 या 17 डिग्री सेल्सियस पर सेट कर दें. आमतौर पर लोगों को लगता है कि ऐसा करने से कमरा तेजी से ठंडा होगा और गर्मी से तुरंत राहत मिलेगी. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत आपकी सेहत और जेब दोनों पर भारी पड़ सकती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, AC का तापमान जरूरत से ज्यादा कम रखने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. इतना ही नहीं, इससे बिजली की खपत भी बढ़ती है और महीने के अंत में बिजली का बिल उम्मीद से कहीं ज्यादा आ सकता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि 16-17 डिग्री पर AC चलाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है और आखिर AC का सही तापमान कितना होना चाहिए.
शरीर को झेलना पड़ता है तापमान का बड़ा झटका
जब बाहर का तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच हो और कमरे का तापमान 16 या 17 डिग्री पर सेट कर दिया जाए, तो शरीर को लगभग 25 से 30 डिग्री तक के अंतर का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जब कोई व्यक्ति बार-बार कमरे से बाहर जाता है या बाहर से कमरे में प्रवेश करता है, तो शरीर को अचानक बदलते तापमान के अनुसार खुद को ढालने में परेशानी होती है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम लगातार काम करता रहता है. लेकिन जब वातावरण में अत्यधिक अंतर होता है, तो शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही वजह है कि कई लोगों को बार-बार सर्दी-जुकाम, नाक बहना, गले में खराश और सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
बढ़ सकता है सर्दी, जुकाम और वायरल संक्रमण का खतरा
बहुत कम तापमान पर AC चलाने का सबसे आम असर सर्दी-जुकाम के रूप में देखने को मिलता है. जब व्यक्ति लंबे समय तक ठंडे कमरे में रहता है और फिर अचानक गर्म वातावरण में निकलता है, तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात में वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों में इसका असर जल्दी देखने को मिलता है. कई बार लोग तेज गर्मी से बचने के लिए घंटों AC में रहते हैं, लेकिन बाद में खांसी, जुकाम और बुखार जैसी समस्याओं से परेशान हो जाते हैं.
मांसपेशियों में अकड़न और जोड़ों के दर्द की शिकायत
लंबे समय तक अत्यधिक ठंडे वातावरण में रहने का असर केवल श्वसन तंत्र पर ही नहीं पड़ता, बल्कि शरीर की मांसपेशियों और जोड़ों पर भी दिखाई देता है. डॉक्टरों के अनुसार, बहुत ठंडे कमरे में लगातार बैठे रहने से मांसपेशियां सख्त होने लगती हैं, जिससे अकड़न और दर्द की समस्या पैदा हो सकती है. जो लोग पहले से गठिया, जोड़ों के दर्द या मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें इसका असर और ज्यादा महसूस हो सकता है. कई बार लोग सुबह उठने पर गर्दन, कमर या घुटनों में दर्द की शिकायत करते हैं, जिसका एक कारण लंबे समय तक अत्यधिक ठंडे तापमान में रहना भी हो सकता है.
त्वचा और आंखों को भी हो सकता है नुकसान
AC लगातार चलने से कमरे की नमी कम हो जाती है. यदि तापमान बहुत कम रखा जाए तो हवा और अधिक शुष्क हो सकती है. इसका सीधा असर त्वचा और आंखों पर पड़ता है. त्वचा में रूखापन, खुजली और जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. वहीं आंखों में ड्राईनेस, लालपन और जलन महसूस हो सकती है. जो लोग लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं, उन्हें यह समस्या और ज्यादा परेशान कर सकती है. इसलिए विशेषज्ञ समय-समय पर पानी पीने और आंखों को आराम देने की सलाह देते हैं.
अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को बरतनी चाहिए विशेष सावधानी
अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए बहुत कम तापमान वाला वातावरण नुकसानदायक माना जाता है. अत्यधिक ठंडी हवा कई बार सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकती है. एलर्जी के मरीजों को भी ठंडी और शुष्क हवा से दिक्कत हो सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोगों को AC का तापमान संतुलित रखना चाहिए और बहुत ठंडे वातावरण में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए. इससे सांस संबंधी परेशानियों के बढ़ने का खतरा कम किया जा सकता है.
क्या 16 डिग्री पर AC चलाने से कमरा जल्दी ठंडा होता है?
कई लोगों की यह धारणा होती है कि AC को 16 डिग्री पर सेट करने से कमरा तेजी से ठंडा हो जाता है. हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि AC का कूलिंग सिस्टम एक निश्चित क्षमता से काम करता है. इसका मतलब यह है कि AC 24 डिग्री पर हो या 16 डिग्री पर, शुरुआती कूलिंग स्पीड लगभग समान रहती है. फर्क सिर्फ इतना होता है कि 16 डिग्री तक पहुंचने के लिए AC को ज्यादा समय तक लगातार चलना पड़ता है. यानी कमरा जल्दी नहीं, बल्कि ज्यादा ठंडा होता है और इसके लिए मशीन को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है.
बिजली बिल पर पड़ता है सीधा असर
AC का तापमान जितना कम रखा जाता है, उसके कंप्रेसर को उतनी अधिक मेहनत करनी पड़ती है. अधिक मेहनत का मतलब अधिक बिजली की खपत है. यही वजह है कि 16 या 17 डिग्री पर लगातार AC चलाने से बिजली का बिल काफी बढ़ सकता है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान को संतुलित रखने से बिजली की खपत कम होती है और AC की कार्यक्षमता भी बेहतर बनी रहती है. इससे मशीन की उम्र पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
आखिर AC का सही तापमान कितना होना चाहिए?
स्वास्थ्य और ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार AC का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना सबसे बेहतर माना जाता है. इस तापमान पर कमरा आरामदायक बना रहता है, शरीर को ज्यादा तापमान अंतर का सामना नहीं करना पड़ता और बिजली की खपत भी नियंत्रित रहती है. इसी वजह से कई सरकारी और ऊर्जा बचत अभियान भी लोगों को AC को 24 डिग्री या उससे अधिक तापमान पर चलाने की सलाह देते हैं. इससे स्वास्थ्य और ऊर्जा दोनों की दृष्टि से लाभ मिलता है.
इन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों पर अत्यधिक ठंडे तापमान का असर ज्यादा पड़ सकता है. इसके अलावा जो लोग जोड़ों के दर्द, गठिया या मांसपेशियों की समस्याओं से परेशान हैं, उन्हें भी बहुत कम तापमान पर AC चलाने से बचना चाहिए. वहीं ऐसे कर्मचारी जो दिनभर AC वाले कमरों में काम करते हैं, उन्हें समय-समय पर सामान्य वातावरण में भी कुछ समय बिताना चाहिए. लगातार अत्यधिक ठंडे वातावरण में रहने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है और कई स्वास्थ्य समस्याएं जन्म ले सकती हैं.
गर्मी से राहत के साथ स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
गर्मी से बचने के लिए AC निश्चित रूप से एक प्रभावी साधन है, लेकिन उसका सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है. केवल कमरा जल्दी ठंडा करने की सोचकर AC को 16 या 17 डिग्री पर चलाना समझदारी नहीं मानी जाती. इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं और बिजली बिल भी अधिक आ सकता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि AC का तापमान संतुलित रखें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और लंबे समय तक अत्यधिक ठंडे वातावरण में रहने से बचें. इससे गर्मी से राहत भी मिलेगी और स्वास्थ्य पर भी कोई अनावश्यक नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
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